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मुजफ्फरपुर की स्लम बस्तियों से नेशनल तक का सफर: सब्जी बेचने और मजदूरी करने वाले माता-पिता की बेटियों ने वुशू में जीता गोल्ड

मुजफ्फरपुर की बेटियों का कमाल

मुजफ्फरपुर की तंग गलियों और स्लम बस्तियों में रहने वाली दो होनहार बेटियों ने अपनी मेहनत और जज्बे से पूरे बिहार का नाम रोशन किया है। सिकंदरपुर मुक्तिधाम परिसर में स्थित ‘अप्पन पाठशाला’ में पढ़ने वाली माहिरा और संध्या ने भागलपुर में आयोजित 16वीं राज्य स्तरीय वुशू चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। अब ये दोनों बेटियां राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में बिहार का प्रतिनिधित्व करेंगी।

आर्थिक तंगी को पीछे छोड़ हासिल की जीत

माहिरा और संध्या की सफलता की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। माहिरा के पिता सब्जी बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि संध्या के पिता मजदूरी करते हैं। इन दोनों बच्चियों ने सीमित संसाधनों के बावजूद कभी हार नहीं मानी। पिछले पांच वर्षों से अप्पन पाठशाला से जुड़ी ये छात्राएं करीब डेढ़ साल से वुशू का प्रशिक्षण ले रही हैं। रोजाना दो घंटे का कड़ा अभ्यास उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा है।

प्रशिक्षण और मार्गदर्शन का मिला साथ

अपनी इस उपलब्धि का श्रेय दोनों बच्चियों ने अपने प्रशिक्षकों सुनील कुमार, अजीत कुमार सिंह और खेलो इंडिया के कोच करण कुमार को दिया है। अप्पन पाठशाला के संस्थापक सुमित कुमार का मानना है कि माहिरा और संध्या ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं होती। कोच सुनील कुमार के अनुसार, अब राष्ट्रीय स्तर की तैयारी के लिए इन बच्चियों का अभ्यास समय बढ़ाकर चार घंटे किया जाएगा ताकि वे देश के लिए पदक जीत सकें।

क्या है वुशू खेल?

वुशू एक प्राचीन चीनी मार्शल आर्ट है, जिसे आधुनिक समय में खेल के रूप में काफी लोकप्रियता मिली है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे दो मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है:

  • सांडा: यह एक फुल-कॉन्टैक्ट फाइट है, जिसमें किक, पंच और थ्रो का इस्तेमाल किया जाता है।
  • ताओलू: यह प्रदर्शन-आधारित प्रारूप है, जिसमें खिलाड़ी अपनी कलाबाजी और मार्शल आर्ट के पैंतरे दिखाते हैं।

भारत में वुशू को बढ़ावा देने के लिए 1989 में वुशू एसोसिएशन ऑफ इंडिया का गठन किया गया था। आज मुजफ्फरपुर की इन बेटियों का नेशनल स्तर तक पहुंचना इस खेल के प्रति युवाओं के बढ़ते रुझान को भी दर्शाता है। माहिरा और संध्या का सपना अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है।


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