मुजफ्फरपुर में मोतियाबिंद इलाज का संकट: सदर अस्पताल में ऑपरेशन ठप, एसकेएमसीएच पर बढ़ा मरीजों का बोझ
मोतियाबिंद के मरीजों की बढ़ी परेशानी
मुजफ्फरपुर के स्वास्थ्य तंत्र में एक बड़ी विसंगति सामने आई है। जिले के दो प्रमुख सरकारी अस्पतालों में मोतियाबिंद के इलाज को लेकर हालात बिल्कुल उलट हैं। एक ओर जहां एसकेएमसीएच में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है, वहीं सदर अस्पताल का आई ऑपरेशन थिएटर (आई ओटी) लंबे समय से मरीजों की बाट जोह रहा है।
आंकड़ों में छिपा सच
सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो इस साल जनवरी से मई के बीच एसकेएमसीएच में 95 सफल ऑपरेशन किए गए हैं। इसके विपरीत, इसी अवधि में सदर अस्पताल में केवल एक मोतियाबिंद का ऑपरेशन हो पाया है। यह अंतर स्वास्थ्य सेवाओं के वितरण में आ रही बाधाओं को दर्शाता है।
संसाधनों की कमी और प्रशासनिक दावे
सदर अस्पताल में ऑपरेशन प्रक्रिया के ठप होने के पीछे मुख्य कारण लेंस की बार-बार होने वाली किल्लत है। पिछले एक साल में कई बार ऐसी स्थिति बनी है कि लेंस उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को बैरंग लौटना पड़ा। इसके अलावा, अस्पताल में आंखों के दो डॉक्टर तो तैनात हैं, लेकिन सर्जन के रूप में केवल एक ही डॉक्टर उपलब्ध हैं, जो कामकाज की गति को प्रभावित करता है। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि अब लेंस की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई है और डॉक्टरों को ऑपरेशन की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
चश्मों की बढ़ती मांग
मोतियाबिंद के इलाज के साथ ही एक नई चुनौती भी सामने आई है। ऑपरेशन कराने वाले करीब 80 प्रतिशत बुजुर्गों में ‘प्रेसबायोपिक’ यानी नजदीक की नजर कमजोर होने की समस्या देखी गई है। इसे देखते हुए ‘अंधापन निवारण कार्यक्रम’ के तहत प्रेसबायोपिक चश्मों की मांग में भारी उछाल आया है। स्वास्थ्य विभाग ने वितरण की जिम्मेदारी एक निजी एजेंसी को सौंपी है, ताकि जिलों में मांग के अनुसार चश्मे जल्द उपलब्ध कराए जा सकें।
जिले के स्वास्थ्य विभाग को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि सदर अस्पताल में संसाधन और स्टाफ का बेहतर तालमेल हो, ताकि एसकेएमसीएच पर मरीजों का अतिरिक्त दबाव कम किया जा सके और आम लोगों को समय पर इलाज मिल सके।
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