मुजफ्फरपुर: बाबा गरीबनाथ मंदिर की आय में उछाल, एक साल में सवा करोड़ से अधिक का चढ़ावा
आस्था का केंद्र बना बाबा गरीबनाथ धाम
मुजफ्फरपुर के हृदय स्थल पर स्थित बाबा गरीबनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ का असर अब मंदिर की आय पर भी साफ दिखने लगा है। बीते एक वर्ष के दौरान मंदिर को चढ़ावे और पूजन शुल्क के रूप में रिकॉर्ड 1.15 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई है। यह आंकड़ा पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में करीब आठ लाख रुपये अधिक है, जो मंदिर की बढ़ती लोकप्रियता और भक्तों की अटूट आस्था को दर्शाता है।
पारदर्शी व्यवस्था से बढ़ी सुविधा
मंदिर न्यास समिति ने आय-व्यय के प्रबंधन को पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित बना दिया है। मंदिर परिसर में बैंक ऑफ महाराष्ट्र का कलेक्शन सेंटर स्थापित होने से श्रद्धालुओं को काफी सहूलियत हुई है। अब भक्त नकद के साथ-साथ डिजिटल माध्यमों से भी अपनी भेंट राशि जमा कर सकते हैं। मंदिर में होने वाले विभिन्न संस्कारों और विशेष पूजा-अर्चना के लिए रसीद कटवाने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है, जिससे श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ता।
दानपेटियों से हर महीने लाखों की आवक
मंदिर की आय के मुख्य स्रोतों में दानपेटियां और रसीद के माध्यम से प्राप्त शुल्क शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार, मंदिर परिसर में रखी दानपेटियों से हर महीने औसतन चार से पांच लाख रुपये की राशि प्राप्त होती है। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक पुख्ता तंत्र बनाया गया है। अनुमंडल पदाधिकारी (पूर्वी) की देखरेख में प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी की मौजूदगी में हर महीने दानपेटियों को खोला जाता है और पूरी राशि को मंदिर समिति के आधिकारिक बैंक खाते में सुरक्षित जमा कर दिया जाता है।
भक्तों के लिए स्पष्ट निर्देश
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर न्यास समिति ने पूजा के शुल्कों की सूची सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की है। इस शुल्क में पूजा की दक्षिणा भी शामिल होती है, जिससे भक्तों को स्पष्टता रहती है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि प्राप्त होने वाली इस राशि का उपयोग मंदिर के रखरखाव, व्यवस्थाओं को आधुनिक बनाने और आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं को बेहतर करने में किया जाता है। बाबा गरीबनाथ के दरबार में बढ़ती यह आर्थिक सक्रियता न केवल मंदिर के विकास को गति दे रही है, बल्कि मुजफ्फरपुर की धार्मिक पहचान को भी और अधिक सशक्त बना रही है।
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