पूर्व सांसद राम प्रसाद कुशवाहा का निधन: बिहार ने खोया जनसेवा का एक प्रेरणास्रोत
बिहार की राजनीति और समाजसेवा में अपना अमिट छाप छोड़ने वाले पूर्व सांसद राम प्रसाद कुशवाहा का 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया। लंबी बीमारी से जूझने के बाद उन्होंने रविवार रात रोहतास जिले के कोचस स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है, और उनके चाहने वालों की भीड़ अंतिम दर्शन के लिए उनके आवास पर उमड़ पड़ी है।
राम प्रसाद कुशवाहा का सार्वजनिक जीवन जनसेवा और समर्पण का एक उत्कृष्ट उदाहरण रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत कोचस पंचायत के मुखिया के रूप में की थी, जहां उन्होंने दो बार (1967 से) इस पद पर रहकर जनता की सेवा की। उनकी सादगी और सरल व्यक्तित्व ने उन्हें लोगों के बीच अत्यंत प्रिय बना दिया था।
एक सफल राजनीतिक यात्रा
कुशवाहा जी ने अपनी राजनीतिक यात्रा में कई महत्वपूर्ण पड़ाव तय किए। वे 1989 और 1991 में जनता दल के टिकट पर बिक्रमगंज लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। इसके बाद, 1999 में उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल के सदस्य के रूप में आरा लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। लोकसभा के अलावा, वे बिहार विधान परिषद के सदस्य भी रहे, जहां उन्होंने राज्य के विकास और जनहित के मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद की।
उनके पुत्र रविंद्र कुमार सिन्हा और भतीजे रामप्रवेश कुशवाहा ने बताया कि वे काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे। रविवार शाम लगभग सात बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से एक युग का अंत हो गया है, जिसने लोहियावादी और समाजवादी विचारधारा को बिहार की राजनीति में मजबूती प्रदान की।
मुख्यमंत्री ने जताया शोक
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूर्व सांसद राम प्रसाद कुशवाहा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, “पूर्व सांसद एवं विधान परिषद सदस्य रहे राम प्रसाद कुशवाहा जी के निधन का दुःखद समाचार अत्यंत ही पीड़ादायक है। उन्होंने बिक्रमगंज एवं आरा का प्रतिनिधित्व करते हुए शोषितों, दलितों एवं पिछड़ों की आवाज को सदैव मजबूती से उठाया। उनका सार्वजनिक जीवन समाज सेवा एवं जनसमर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण रहा। ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को शांति प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों एवं समर्थकों को इस दुःख को सहने की शक्ति दें।”
राम प्रसाद कुशवाहा को उनके समर्थक एक ऐसे नेता के रूप में याद करते हैं जिन्होंने हमेशा समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए काम किया। वे मध्य विद्यालय दिनारा में शिक्षक भी रहे थे, जिससे पता चलता है कि शिक्षा के प्रति भी उनका गहरा लगाव था। उनके निधन से बिहार ने एक ऐसे जननेता को खो दिया है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।
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