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मुजफ्फरपुर में बांस की आड़ में शराब का ‘सीक्रेट तहखाना’ बेनकाब, 30 लाख की बीयर बरामद

बांस के नीचे छिपा था अवैध कारोबार

मुजफ्फरपुर में शराब तस्करों ने पुलिस को चकमा देने के लिए एक बेहद शातिर तरीका अपनाया, लेकिन उत्पाद विभाग की मुस्तैदी ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। असम से आ रहे एक कंटेनर में बांस की आड़ में विदेशी बीयर की बड़ी खेप तस्करी की जा रही थी। देखने में यह कंटेनर सामान्य मालवाहक लग रहा था, लेकिन इसके भीतर बना गुप्त तहखाना तस्करों की पोल खोलने के लिए काफी था।

गुप्त चैंबर का खुलासा

उत्पाद थानाध्यक्ष दीपक कुमार सिंह को गुप्त सूचना मिली थी कि शराब की एक बड़ी खेप बिहार की सीमा में प्रवेश कर रही है। इस सूचना के आधार पर बोचहा से लेकर मैठी टोल प्लाजा तक सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। मझौली इलाके में जब एक संदिग्ध कंटेनर को रोककर तलाशी ली गई, तो चालक और खलासी ने बांस लदे होने की बात कही। हालांकि, अधिकारियों को उनकी बातों पर संदेह हुआ और जब कंटेनर की गहराई से जांच की गई, तो बांस के ढेर के नीचे एक विशेष रूप से तैयार किया गया गुप्त चैंबर मिला।

350 कार्टन बीयर और गिरफ्तारी

इस सीक्रेट तहखाने से विदेशी बीयर के 350 से अधिक कार्टन बरामद किए गए। बाजार में इन बीयर की कीमत करीब 30 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस ने मौके से कंटेनर के चालक अमित कुमार और खलासी निक्की कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपी मुजफ्फरपुर के करजा थाना क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं।

जांच का दायरा बढ़ा

प्रारंभिक पूछताछ में यह बात सामने आई है कि यह खेप मुजफ्फरपुर में ही खपाई जानी थी। उत्पाद विभाग अब इस बात की जांच कर रहा है कि इस तस्करी के पीछे कौन सा बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है और इसका मास्टरमाइंड कौन है। तस्करों ने बांस के सहारे पुलिस की नजरों से बचने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन उनका यह ‘सीक्रेट तहखाना’ ज्यादा देर तक राज नहीं रह सका। पुलिस अब इस पूरे रैकेट के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।


अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध स्थानीय स्रोतों के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है। AI से त्रुटियाँ संभव हैं और इस सामग्री की सटीकता या प्रामाणिकता की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। TheAinak केवल सूचनाओं का संकलन करता है और इसकी विषय-वस्तु के लिए उत्तरदायी नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने या उसके आधार पर कोई कार्रवाई करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य कर लें।

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