बैरिया बस टर्मिनल को मिलेंगे ₹104 करोड़: आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा मुजफ्फरपुर का नया केंद्र
मुजफ्फरपुर के बैरिया स्थित बैकुंठ शुक्ल बस टर्मिनल के निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए अब अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) से 104 करोड़ रुपये की राशि मिलेगी। इस महत्वपूर्ण परियोजना को गति देने के लिए केंद्रीय आवासन व शहरी कार्य मंत्रालय ने हरी झंडी दे दी है। यह निर्णय शुक्रवार को नगर निगम सभागार में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में लिया गया, जिसमें मंत्रालय के संयुक्त सचिव व वित्तीय सलाहकार संजीत ने अधिकारियों को तेजी से काम आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
पहले इस परियोजना के बजट में दो बार कटौती की गई थी, जिससे मूल 137.79 करोड़ रुपये का बजट घटकर मात्र 51 करोड़ रुपये रह गया था। इसके परिणामस्वरूप टर्मिनल भवन का दायरा सीमित कर दिया गया था और कई अन्य सुविधाएं भी कम कर दी गई थीं। अब, पुरानी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के तहत काम होगा, जिसमें बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर के साथ चार मंजिला टर्मिनल भवन का निर्माण शामिल है।
यात्रियों के लिए मिलेंगी थ्री-स्टार होटल जैसी सुविधाएं
इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि यात्रियों को अब बस टर्मिनल परिसर में ही ठहरने और खान-पान की आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। इसके लिए टर्मिनल भवन से अलग एक दो मंजिला भवन का निर्माण किया जाएगा, जिसमें डॉरमेट्री और रेस्टोरेंट की व्यवस्था होगी। यह सुविधा यात्रियों को थ्री-स्टार होटलों जैसी आरामदायक अनुभव प्रदान करेगी और टर्मिनल के लिए राजस्व का एक नया स्रोत भी बनेगी।
अन्य प्रमुख सुविधाएं:
- ई-चार्जिंग स्टेशन: परिसर में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन की सुविधा होगी।
- विशाल पार्किंग: 150 बसों की पार्किंग के साथ-साथ आंतरिक सड़कें भी बनाई जाएंगी।
- वर्कशॉप और लाउंज: बसों के रखरखाव के लिए वर्कशॉप, यात्रियों के लिए प्रतीक्षालय (वेटिंग लाउंज) और गार्ड रूम भी होंगे।
- पार्किंग व्यवस्था: ऑटो पार्किंग के अलावा, बाहरी लोगों के निजी वाहनों के लिए भी पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी।
- वाणिज्यिक स्थान: चार मंजिला टर्मिनल भवन में डिपार्टमेंटल स्टोर और कैफेटेरिया भी शामिल होंगे, जो यात्रियों और आगंतुकों दोनों के लिए उपयोगी होंगे।
बैठक में नगर आयुक्त ऋतुराज प्रताप सिंह, बुडको के परियोजना निदेशक श्रीनिवासन, उप नगर आयुक्त स्वरा सहित कई अन्य अधिकारी मौजूद रहे। केंद्रीय आवासन व शहरी कार्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव संजीत ने परियोजना के वित्तीय मॉडल, राजस्व सृजन की संभावनाओं और क्रियान्वयन रणनीति की समीक्षा की। उन्होंने जोर दिया कि यह परियोजना न केवल शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाएगी, बल्कि भविष्य में राजस्व सृजन का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। इस पहल से मुजफ्फरपुर के परिवहन ढांचे में एक बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।
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