BRABU में पीएचडी नामांकन पर ब्रेक: पैट रिजल्ट में धांधली के आरोपों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन का बड़ा फैसला
पीएचडी दाखिले की प्रक्रिया पर अनिश्चितकालीन रोक
मुजफ्फरपुर स्थित बीआरए बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) में पीएचडी में दाखिले की राह फिलहाल कठिन हो गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पैट (पीएचडी एडमिशन टेस्ट) के परिणामों में सामने आई गंभीर विसंगतियों और रोस्टर संबंधी त्रुटियों के कारण नामांकन की पूरी प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है। इस फैसले के बाद उन सैकड़ों छात्रों की चिंता बढ़ गई है, जो लंबे समय से शोध कार्य शुरू करने का इंतजार कर रहे थे।
क्यों मचा है बवाल?
विश्वविद्यालय द्वारा जारी पूर्व कार्यक्रम के अनुसार, सोमवार से विभिन्न पीजी विभागों में नामांकन की प्रक्रिया शुरू होनी थी। हालांकि, रिजल्ट जारी होने के बाद से ही छात्र संगठनों ने मोर्चा खोल दिया था। छात्रों का आरोप है कि परिणाम तैयार करने में भारी अनियमितताएं बरती गई हैं। मुख्य शिकायतों में शामिल हैं:
- आरक्षित वर्ग के छात्रों को सामान्य श्रेणी में डालना।
- सामान्य और ओबीसी वर्ग के मेधावी छात्रों का नाम एससी श्रेणी में प्रदर्शित करना।
- इतिहास और भूगोल जैसे विषयों में टॉपर्स को मेरिट लिस्ट से बाहर कर देना।
इन विसंगतियों के खिलाफ शनिवार को विभिन्न छात्र संगठनों ने मशाल जुलूस निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया था। छात्रों का कहना है कि रोस्टर नियमों की अनदेखी कर रिजल्ट जारी किया गया है, जिससे योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है।
किन विषयों पर है संकट?
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्वीकार किया है कि कुछ विषयों के परिणामों में तकनीकी और रोस्टर संबंधी खामियां हैं। वर्तमान में इतिहास, जूलॉजी, अर्थशास्त्र और भूगोल विषयों के परिणामों की गहन जांच की जा रही है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि अन्य विषयों की आपत्तियों का निपटारा कर लिया गया है, लेकिन इन चार विषयों में सुधार के बाद ही नामांकन का रास्ता साफ हो सकेगा।
अगले कदम का इंतजार
विश्वविद्यालय प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि त्रुटियों को दूर करने का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले सप्ताह तक नई अधिसूचना जारी की जा सकती है, जिसके बाद ही नामांकन की प्रक्रिया बहाल होगी। तब तक छात्रों को धैर्य रखने की सलाह दी गई है। यह पूरा प्रकरण विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है, जिस पर प्रशासन को जल्द ही ठोस जवाब देना होगा।
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