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मुजफ्फरपुर का सिकंदरपुर मन बना ‘डेथ जोन’: जहरीले पानी से मर रहीं मछलियां, प्रशासन से कार्रवाई की मांग

सिकंदरपुर मन में पर्यावरणीय आपदा

मुजफ्फरपुर के हृदय स्थल में स्थित ऐतिहासिक सिकंदरपुर मन इन दिनों एक गंभीर पर्यावरणीय संकट से जूझ रहा है। पिछले डेढ़ महीने से यहां मछलियों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे न केवल जलीय पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में है, बल्कि आसपास के निवासियों का जीना भी मुहाल हो गया है। जलाशय से उठने वाली दुर्गंध ने स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।

जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

लगातार हो रही मछलियों की मौत के बाद जिला मत्स्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पानी के नमूनों को पटना स्थित प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा था। रिपोर्ट ने उन आशंकाओं को सच साबित कर दिया है, जो लंबे समय से जताई जा रही थीं। पानी में अमोनिया की मात्रा खतरनाक स्तर तक बढ़ गई है, जो जलीय जीवों के लिए प्राणघातक साबित हो रही है। विशेष रूप से ‘कतला’ मछली पर इसका सबसे घातक असर देखा गया है, जो पानी की ऊपरी सतह पर रहने के कारण सीधे तौर पर प्रदूषित जल और ऑक्सीजन की कमी का शिकार हो रही है।

प्रदूषण के प्रमुख स्रोत

मत्स्य विभाग की विस्तृत रिपोर्ट में प्रदूषण के लिए तीन मुख्य कारकों को जिम्मेदार ठहराया गया है:

  • मेडिकल वेस्ट: शहर के अस्पतालों से निकलने वाले जैविक और रासायनिक कचरे का बिना किसी उपचार के सीधे जलाशय में बहाया जाना।
  • धोबी घाट का रसायन: परिसर में स्थित धोबी घाट से डिटर्जेंट और अन्य हानिकारक रसायनों का सीधा निकास।
  • अवैध जल निकासी: बिना ट्रीटमेंट के औद्योगिक और घरेलू कचरे का मन के पानी में मिलना।

प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की दरकार

मत्स्य विभाग ने जिला प्रशासन और नगर निगम को अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए तत्काल प्रभाव से प्रदूषण के इन स्रोतों को बंद करने की सिफारिश की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि मेडिकल वेस्ट के निस्तारण और जल शोधन की व्यवस्था नहीं की गई, तो यह जलाशय पूरी तरह से मृत हो जाएगा। वहीं, इस व्यवसाय से जुड़े स्थानीय मत्स्य पालकों को लाखों का नुकसान हो चुका है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह न केवल आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि शहर के इस प्रमुख जलस्रोत का अस्तित्व भी मिट जाएगा। अब गेंद जिला प्रशासन के पाले में है कि वे इस पर्यावरणीय त्रासदी को रोकने के लिए क्या कदम उठाते हैं।


अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध स्थानीय स्रोतों के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है। AI से त्रुटियाँ संभव हैं और इस सामग्री की सटीकता या प्रामाणिकता की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। TheAinak केवल सूचनाओं का संकलन करता है और इसकी विषय-वस्तु के लिए उत्तरदायी नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने या उसके आधार पर कोई कार्रवाई करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य कर लें।

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