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मुजफ्फरपुर: सरकारी स्कूलों में त्रैमासिक परीक्षा का बुरा हाल, सीढ़ियों पर बैठकर इम्तिहान देने को मजबूर बच्चे

व्यवस्था पर सवाल: मुजफ्फरपुर के स्कूलों में परीक्षा के दौरान संसाधनों की कमी

मुजफ्फरपुर के सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक की त्रैमासिक परीक्षा की शुरुआत अव्यवस्थाओं के साये में हुई। परीक्षा के पहले दिन ही जिले के कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव साफ तौर पर देखने को मिला। स्थिति इतनी खराब थी कि कई जगहों पर बच्चों को बेंच-डेस्क तो दूर, कक्षा के अंदर बैठने तक की जगह नहीं मिली। मजबूरन छात्रों को बरामदे और सीढ़ियों पर बैठकर अपना पेपर देना पड़ा।

दोहरी चुनौती: एक साथ परीक्षा और पढ़ाई

शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार, परीक्षा के दौरान ही कक्षाओं का संचालन भी अनिवार्य किया गया है। इस दोहरी जिम्मेदारी के कारण स्कूलों में जगह की भारी कमी हो गई। पहली पाली में जब प्राथमिक कक्षाओं की परीक्षा चल रही थी, तब उच्च प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाया जा रहा था, और दूसरी पाली में यही स्थिति उलट दी गई। सीमित कमरों के कारण छात्रों को खुले बरामदों और सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ा, जिससे परीक्षा की गरिमा और एकाग्रता दोनों प्रभावित हुईं।

तकनीकी खामियों ने बढ़ाई शिक्षकों की परेशानी

परीक्षा के संचालन में ‘ई-शिक्षा कोष’ पोर्टल से प्रश्नपत्र डाउनलोड करने की प्रक्रिया ने शिक्षकों के पसीने छुड़ा दिए। ग्रामीण इलाकों में खराब नेटवर्क के कारण सुबह 10 बजे से शुरू होने वाली परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र डाउनलोड करने में आधे घंटे से अधिक का समय लग गया। कई स्कूलों में तो स्थिति इतनी विकट थी कि शिक्षकों को ब्लैकबोर्ड पर प्रश्न लिखकर परीक्षा लेनी पड़ी, जबकि कुछ जगहों पर दूसरे स्कूलों से व्हाट्सएप के जरिए प्रश्नपत्र मंगवाए गए।

प्रश्नपत्रों में त्रुटियों का अंबार

सिर्फ तकनीकी समस्या ही नहीं, बल्कि प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। अंग्रेजी के 25 अंकों के पेपर में कई त्रुटियां पाई गईं। छठी कक्षा के प्रश्नपत्र में जहां प्रश्नों की जगह निर्देश छपे हुए थे, वहीं अन्य कक्षाओं के पेपर में भी विसंगतियां देखने को मिलीं। इन खामियों के कारण न केवल छात्रों को भ्रम हुआ, बल्कि परीक्षा के आयोजन की पूरी प्रक्रिया पर भी सवालिया निशान लग गए हैं। विभाग को अब इन व्यवस्थागत कमियों को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है ताकि भविष्य में बच्चों को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।


अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध स्थानीय स्रोतों के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है। AI से त्रुटियाँ संभव हैं और इस सामग्री की सटीकता या प्रामाणिकता की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। TheAinak केवल सूचनाओं का संकलन करता है और इसकी विषय-वस्तु के लिए उत्तरदायी नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने या उसके आधार पर कोई कार्रवाई करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य कर लें।

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