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गायघाट में सहयोग शिविर पर उठे सवाल: 309 शिकायतों के निपटारे का दावा, ग्रामीण बोले- ‘खानापूर्ति’

मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट प्रखंड की तीन पंचायतों में मंगलवार को आयोजित सहयोग शिविर की सफलता पर सवाल उठ रहे हैं। एक ओर जहां अधिकारियों ने 309 शिकायतों के निपटारे का दावा किया है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों ने शिविर को महज ‘खानापूर्ति’ करार दिया है। उनका आरोप है कि कई महत्वपूर्ण समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया और शिविर का प्रचार-प्रसार भी पर्याप्त नहीं था।

प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) डॉ. संजय कुमार राय के अनुसार, बोआरीडीह, कमरथू और लोमा पंचायतों में सहयोग शिविर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। उन्होंने बताया कि बोआरीडीह में 100, कमरथू में 104 और लोमा पंचायत में 105 मामलों का निष्पादन किया गया, जिससे कुल 309 शिकायतों का समाधान हुआ। बीडीओ ने यह भी आश्वासन दिया कि शेष लंबित मामलों का भी जल्द निपटारा कर दिया जाएगा।

ग्रामीणों के गंभीर आरोप

हालांकि, कमरथू पंचायत के ग्रामीणों ने शिविर की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। डॉ. मुकेश सिंह, गौरव कुमार, सुशील सिंह, राकेश सिंह, राजन देवी, भरत सहनी, फुलटुन राम और बिन्देश्वर सहनी सहित कई स्थानीय निवासियों का कहना है कि शिविर में उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया।

ग्रामीणों ने विशेष रूप से नल-जल योजना की बदहाली का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि पंचायत के कई स्थानों पर नल-जल योजना ठप पड़ी है, लेकिन पीएचईडी विभाग के काउंटर पर शिकायतों के समाधान के लिए केवल मिस्त्री मौजूद थे। कनीय अभियंता की अनुपस्थिति ने ग्रामीणों को निराश किया, क्योंकि वे तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर समाधान की उम्मीद कर रहे थे।

एक अन्य महत्वपूर्ण आरोप यह था कि सहयोग शिविर के बारे में पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं किया गया। ग्रामीणों का दावा है कि अधिकांश लोगों को शिविर की जानकारी ही नहीं मिल पाई, जिसके कारण वे अपनी शिकायतें दर्ज कराने से वंचित रह गए। यह स्थिति शिविर के मूल उद्देश्य पर प्रश्नचिह्न लगाती है, जिसका लक्ष्य आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करना है।

यह घटनाक्रम स्थानीय प्रशासन और जनता के बीच संवाद की कमी को उजागर करता है। जहां अधिकारी सफल आयोजन का दावा कर रहे हैं, वहीं जमीनी स्तर पर लोग असंतुष्ट दिख रहे हैं। अब देखना यह होगा कि लंबित मामलों के निपटारे और ग्रामीणों की शिकायतों को दूर करने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है।


अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध स्थानीय स्रोतों के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है। AI से त्रुटियाँ संभव हैं और इस सामग्री की सटीकता या प्रामाणिकता की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। TheAinak केवल सूचनाओं का संकलन करता है और इसकी विषय-वस्तु के लिए उत्तरदायी नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने या उसके आधार पर कोई कार्रवाई करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य कर लें।

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