मुजफ्फरपुर: अतिक्रमण हटाने पहुंची निगम टीम का व्यापारियों ने किया विरोध, पूर्व विधायक के हस्तक्षेप से टला विवाद
मुजफ्फरपुर के छाता बाजार से माखन साह चौक तक सड़क पर अतिक्रमण हटाने पहुंची नगर निगम की टीम को गुरुवार को स्थानीय व्यापारियों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। लगभग आधे घंटे तक अफरातफरी का माहौल बना रहा, जिसके बाद पूर्व नगर विधायक विजेंद्र चौधरी के हस्तक्षेप से निगम की टीम को वापस लौटना पड़ा।
स्थानीय व्यापारियों और निवासियों का कहना है कि अतिक्रमण हटाना एक सराहनीय कदम है, लेकिन सावन जैसे पवित्र महीने में बिना किसी पूर्व सूचना के कार्रवाई करना उचित नहीं है। पूर्व वार्ड पार्षद राजकुमार राजू ने बताया कि छाता बाजार से माखन साह चौक तक के व्यापारी हमेशा निगम प्रशासन के साथ सहयोग करते रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी कार्रवाई से पहले व्यापारियों के साथ बैठक होनी चाहिए थी।
व्यापारियों की मांग: पहले मापी, फिर कार्रवाई
व्यापारियों ने मांग की है कि छाता बाजार से माखन साह चौक तक सड़क की सही मापी कराई जाए। उनका कहना है कि मापी के बाद सड़क की सीमा में आने वाले सभी निर्माण, चाहे वह दीवार हो, बिजली का खंभा हो, टेलीफोन पोल हो या कोई धार्मिक स्थल ही क्यों न हो, सभी को हटाया जाना चाहिए। इससे व्यापारियों को यह विश्वास होगा कि निगम न्यायोचित कार्रवाई कर रहा है और किसी के साथ भेदभाव नहीं हो रहा है।
पूर्व वार्ड पार्षद राजू ने कहा कि अगर निगम प्रशासन न्यायसंगत तरीके से काम करता है, तो व्यापारी अपनी निजी जमीन भी आवश्यकता पड़ने पर देने को तैयार हैं। उन्होंने गरीबनाथ मंदिर का उदाहरण दिया, जहां 2006 में न्यास समिति बनने के बाद स्थानीय व्यापारियों ने मंदिर के विस्तार के लिए अपनी जमीन दान की थी। उसी सहयोग के कारण आज गरीबनाथ मंदिर भव्य रूप ले चुका है।
बिना सूचना तोड़फोड़ से नुकसान की आशंका
व्यापारियों ने चिंता व्यक्त की कि बिना किसी पूर्व सूचना के जेसीबी मशीन से तोड़फोड़ करने से दुकानों और मकानों को भारी क्षति पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि इससे मकान गिरने का भी खतरा बना रहता है। उनकी मांग है कि पहले जगह को चिन्हित किया जाए और व्यापारियों को उसे खाली करने का समय दिया जाए। यदि व्यापारी आदेश का पालन नहीं करते हैं, तभी उन्हें दोषी माना जाना चाहिए।
इस घटना ने नगर निगम की अतिक्रमण हटाओ मुहिम के तरीके पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि निगम को किसी भी बड़ी कार्रवाई से पहले सभी हितधारकों के साथ संवाद स्थापित करना चाहिए ताकि किसी भी तरह के अनावश्यक विवाद और नुकसान से बचा जा सके।
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