मुजफ्फरपुर: सरकारी स्कूलों के निर्माण कार्यों में बड़ा ‘खेल’, जांच टीम को नहीं मिल रहे जरूरी दस्तावेज
मुजफ्फरपुर के शिक्षा विभाग में फाइलों का अता-पता नहीं
मुजफ्फरपुर जिले के सरकारी विद्यालयों में हुए सिविल कार्यों की जांच एक बड़ी पहेली बन गई है। बेंच-डेस्क की खरीद से लेकर स्कूलों की चहारदीवारी और रंग-रोगन तक, करोड़ों के इन कार्यों में भारी अनियमितता के आरोप लगे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन आरोपों की सच्चाई जानने के लिए गठित जांच समिति के सामने जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय ने फाइलों का अंबार लगाने के बजाय चुप्पी साध ली है।
क्या है पूरा मामला?
जिले के कई स्कूलों में हुए निर्माण कार्यों को लेकर शिकायतें मिली थीं कि काम पूरा होने से पहले ही भुगतान कर दिया गया। आरोप है कि जिन कार्यों का भुगतान मार्च 2025 में ही दिखा दिया गया, वे असल में फरवरी 2026 तक जारी थे। जब जांच समिति ने इन दावों की पड़ताल शुरू की, तो उन्हें वह आधार ही नहीं मिला जिससे भुगतान की पुष्टि हो सके।
जांच समिति के बार-बार मांगने पर भी नहीं मिले दस्तावेज
जांच की प्रक्रिया में डीईओ कार्यालय का असहयोगात्मक रवैया चर्चा का विषय बना हुआ है। अपर समाहर्ता (विभागीय जांच) की ओर से फरवरी से अप्रैल 2026 के बीच पांच बार पत्र भेजे गए, लेकिन फाइलों का कोई अता-पता नहीं चला। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब जांच टीम के सदस्य खुद डीईओ कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां के कर्मियों ने केवल आश्वासन देकर टाल दिया।
- गायब दस्तावेज: कार्यादेश, मापी पुस्तिका (MB) और भुगतान का विवरण नदारद।
- प्रधानाध्यापकों का बयान: कई स्कूलों के प्रधानाध्यापकों ने स्पष्ट कहा कि निर्माण कार्यों के आदेश उनके स्तर से जारी ही नहीं हुए थे।
- जांच पर असर: महत्वपूर्ण कागजात न मिलने के कारण यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि सरकारी खजाने का पैसा नियमों के तहत खर्च हुआ या इसमें कोई बड़ा घोटाला हुआ है।
फिलहाल, फाइलों के गायब होने या न मिलने के कारण पूरी जांच अधर में लटकी हुई है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस मामले में सख्ती बरतते हुए जवाबदेही तय करेगा या यह मामला भी फाइलों के साथ कहीं दबकर रह जाएगा।
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