मुजफ्फरपुर जंक्शन: पार्सल कार्यालय की छत गिरी, बाल-बाल बचे रेलकर्मी; कामकाज प्रभावित
मुजफ्फरपुर जंक्शन स्थित पार्सल ट्रांजिट कार्यालय में बुधवार को एक बड़ा हादसा टल गया। जर्जर हो चुकी छत का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे गिर गया, जिससे कार्यालय में मौजूद रेलकर्मी राहुल बाल-बाल बच गए। हालांकि, इस घटना में कार्यालय का कंप्यूटर सिस्टम और रेलकर्मी का मोबाइल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई और सरकारी कामकाज भी कुछ समय के लिए बाधित रहा।
जानकारी के अनुसार, यह घटना पुराने भवन में स्थित पार्सल ट्रांजिट कार्यालय में हुई। पार्सल कार्यालय को हाल ही में नए सीटीबी (कंबाइंड टर्मिनल बिल्डिंग) में स्थानांतरित किया गया था, जिसके बाद पुराने भवन का उपयोग पार्सल ट्रांजिट कार्यालय के रूप में किया जा रहा था। कर्मचारियों का आरोप है कि कार्यालय शुरू होने के बावजूद इस भवन की जर्जर छत की मरम्मत नहीं कराई गई थी।
सूत्रों के मुताबिक, पार्सल इंचार्ज द्वारा छत की खराब स्थिति को लेकर आइओडब्ल्यू विभाग को लगातार लिखित मेमो भेजे जा रहे थे। इन मेमो में जर्जर छत की तत्काल मरम्मत कराने का आग्रह किया गया था, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसका परिणाम बुधवार को छत के हिस्से के गिरने के रूप में सामने आया।
हादसे के समय रेलकर्मी राहुल कंप्यूटर पर काम कर रहे थे। अचानक छत का मलबा गिरने से वह किसी तरह खुद को बचाने में सफल रहे। मलबे की चपेट में आने से कार्यालय का कंप्यूटर सिस्टम पूरी तरह नष्ट हो गया और राहुल का मोबाइल फोन भी क्षतिग्रस्त हो गया। कंप्यूटर खराब होने के कारण कार्यालय से जुड़े महत्वपूर्ण कामकाज प्रभावित हुए, जिससे कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
इस घटना के बाद स्टेशन परिसर में कार्यरत रेलकर्मियों में गहरा आक्रोश है। कर्मचारियों का कहना है कि संबंधित विभाग को जर्जर छत की स्थिति के बारे में पहले ही सूचित किया जा चुका था। यदि समय रहते इस पर ध्यान दिया जाता और मरम्मत कार्य करा लिया जाता, तो इस हादसे को टाला जा सकता था।
रेल कर्मचारियों ने जंक्शन परिसर में मौजूद सभी पुराने और जर्जर भवनों का तत्काल निरीक्षण कराने की मांग की है। उन्होंने सुरक्षा के मद्देनजर आवश्यक भवनों में अविलंब मरम्मत कार्य शुरू कराने की भी मांग की है, ताकि भविष्य में किसी भी रेलकर्मी या अन्य व्यक्ति की जान खतरे में न पड़े। इस घटना ने रेलवे परिसर में भवनों के रखरखाव और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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