स्थानीय

मुजफ्फरपुर का ‘हाई रिस्क गर्भावस्था’ मॉडल अब पूरे बिहार में, गर्भवती महिलाओं को मिलेगा बेहतर इलाज और फॉलोअप

गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं का सामना कर रही महिलाओं को समय पर और समुचित स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुजफ्फरपुर में शुरू किया गया ‘हाई रिस्क गर्भावस्था (HRP) हेल्प डेस्क मॉडल’ अब पूरे बिहार में लागू किया जाएगा। इस पहल का लक्ष्य उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान से लेकर उनके इलाज, परामर्श और घर तक फॉलोअप को एक एकीकृत व्यवस्था के तहत लाना है, ताकि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सके।

स्वास्थ्य विभाग ने मुजफ्फरपुर में एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इस मॉडल का सफल परीक्षण किया। इस परीक्षण में 315 उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया, जिनके फॉलोअप से यह स्पष्ट हुआ कि केवल सलाह देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जांच, इलाज और रेफरल की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। इसी अनुभव के आधार पर इस हेल्प डेस्क व्यवस्था को विकसित किया गया है, जिसे अब राज्य के सभी जिलों में लागू किया जाएगा।

क्या है ‘हाई रिस्क गर्भावस्था’ हेल्प डेस्क मॉडल?

इस नई व्यवस्था के तहत, गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच के दौरान ही उच्च जोखिम की पहचान की जाएगी। हेल्प डेस्क पर चिकित्सक और नर्स गर्भवती महिला की सामान्य जांच के साथ-साथ भ्रूण की धड़कन, हीमोग्लोबिन, शुगर, पेशाब, ब्लड ग्रुप, एचआईवी और वीडीआरएल जैसी महत्वपूर्ण रिपोर्टों की समीक्षा करेंगे। यदि कोई महिला उच्च जोखिम वाली पाई जाती है, तो उसे ‘लाल स्टिकर’ से चिह्नित किया जाएगा। इसके बाद, उसके लिए एक विशेष जांच, उपचार और रेफरल प्रक्रिया निर्धारित की जाएगी।

इस मॉडल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को केवल जांच तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें समय पर चिकित्सकीय मदद, उचित परामर्श और आवश्यकता पड़ने पर सही स्वास्थ्य सुविधा केंद्र तक रेफरल भी मिले। इसके लिए अस्पताल स्तर के साथ-साथ सामुदायिक स्तर के स्वास्थ्यकर्मियों को भी इस व्यवस्था से जोड़ा गया है, ताकि घर तक फॉलोअप सुनिश्चित किया जा सके।

मुजफ्फरपुर में पायलट प्रोजेक्ट के परिणाम

मुजफ्फरपुर में अप्रैल से अगस्त 2026 तक की अवधि में 32,249 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच की गई, जिनमें से 3,541 महिलाएं उच्च जोखिम वाली पाई गईं। पायलट प्रोजेक्ट के तहत 315 महिलाओं पर किए गए ट्रायल में फोन पर संपर्क कर उनकी स्थिति, जांच और इलाज की जानकारी ली गई। पीरामल के नसीरुल होदा ने बताया कि इस फॉलोअप से उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के लिए एक एकीकृत व्यवस्था की आवश्यकता स्पष्ट हुई। इस अनुभव ने हेल्प डेस्क मॉडल के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो अब पूरे राज्य में लाखों गर्भवती महिलाओं के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकता है।

यह पहल बिहार में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य देखभाल में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने की क्षमता रखती है, जिससे गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं को प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सकेगा और सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित होगा।


अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध स्थानीय स्रोतों के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है। AI से त्रुटियाँ संभव हैं और इस सामग्री की सटीकता या प्रामाणिकता की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। TheAinak केवल सूचनाओं का संकलन करता है और इसकी विषय-वस्तु के लिए उत्तरदायी नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने या उसके आधार पर कोई कार्रवाई करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य कर लें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button