स्थानीय

मुजफ्फरपुर में पटना की तर्ज पर बनेगा मरीन ड्राइव: बूढ़ी गंडक का किनारा बदलेगा शहर की पहचान

मुजफ्फरपुर शहर को जल्द ही एक नई पहचान मिलने वाली है। बूढ़ी गंडक नदी का किनारा अब सिर्फ एक तटबंध नहीं रहेगा, बल्कि पटना के मरीन ड्राइव की तर्ज पर विकसित होकर शहर की सुंदरता में चार चांद लगाएगा। दादर पुल से लकड़ीढाई घाट तक लगभग आठ किलोमीटर लंबा यह मरीन ड्राइव मुजफ्फरपुर के शहरी परिदृश्य को पूरी तरह बदल देगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की संभावनाओं को परखने के लिए विश्व बैंक की एक टीम ने हाल ही में विभिन्न घाटों और नदी किनारे के इलाकों का दौरा किया।

इस परियोजना के तहत नदी किनारे के क्षेत्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। इसमें ग्रीन जोन, पार्क, फूड जोन और वेंडिंग जोन जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इन विकास कार्यों से न केवल शहर में आवागमन की सुविधा बेहतर होगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। विश्व बैंक इस परियोजना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। आने वाले दिनों में विश्व बैंक की तकनीकी टीम विस्तृत सर्वेक्षण कर पूरी परियोजना की रूपरेखा तैयार करेगी। इससे पहले, 21 जून को विश्व बैंक के सात सदस्यीय दल ने रिवर फ्रंट, लेक फ्रंट और सैटेलाइट टाउनशिप की नई संभावनाओं का पता लगाने के लिए स्थल निरीक्षण किया था।

यह उल्लेखनीय है कि पिछले साल नगर विकास विभाग ने दादर कोल्हुआ घाट से बीएमपी छह तक प्रस्तावित छह किलोमीटर लंबे 732 करोड़ रुपये के रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट को अत्यधिक लागत और तकनीकी कारणों से खारिज कर दिया था। हालांकि, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत हाल ही में एक एजेंसी ने 128 करोड़ रुपये की लागत से मुक्तिधाम से आश्रम घाट को जोड़ते हुए सौंदर्यीकरण की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बुडको को सौंपी है। इस डीपीआर में लगभग एक किलोमीटर लंबे सिकंदरपुर स्थित मुक्तिधाम, सीढ़ी घाट और आश्रम घाट को जोड़ने, घाटों को विकसित करने के साथ-साथ वॉक-वे, विसर्जन कुंड और ग्रीन जोन का निर्माण शामिल है।

विश्व बैंक की टीम ने सिकंदरपुर लेक फ्रंट का भी गहन जायजा लिया। इस दौरान यह तय किया गया कि आर्च ब्रिज के माध्यम से तीनों झीलों को जोड़ा जाएगा और पानी के ऊपर पुल का निर्माण होगा। इसके अतिरिक्त, झीलों को भूमिगत तरीके से बूढ़ी गंडक से जोड़ा जाएगा, जिसमें स्लुईस गेट भी बनाए जाएंगे।

शहर के कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाने के लिए, स्टेशन से लेक फ्रंट को सीधे जोड़ा जाएगा। इसके लिए इमलीचट्टी बस स्टैंड रोड, डीएम आवास मोड़ होते हुए कर्बला तक पैदल यात्रियों के लिए एक कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। विश्व बैंक की टीम ने इन संबंधित सड़कों का भी निरीक्षण किया है।

बैठक के दौरान, विश्व बैंक की टीम ने अधिकारियों के साथ संबंधित परियोजनाओं की व्यवहार्यता, वर्तमान स्थिति और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने वर्तमान और भविष्य की संभावनाओं के बीच आबादी, संसाधन, परिवहन और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया। इस बैठक में उप नगर आयुक्त अमित कुमार, स्मार्ट सिटी के मैनेजर अभिषेक रमण, सुभाष पंडित, पीआरओ कौशल सिन्हा और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

नगर आयुक्त सह एमडी, एमएससीएल, ऋतुराज प्रताप सिंह ने कहा कि लेक फ्रंट और रिवर फ्रंट जैसी परियोजनाएं शहर के समग्र विकास को नई दिशा देंगी और इनके पूरा होने से शहर में आधुनिक नागरिक सुविधाओं में वृद्धि होगी।

लेक फ्रंट: 7 संभावनाओं पर विश्व बैंक टीम की नजर

  • धोबी घाट के पास गरीबों का आवासीय परिसर

अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध स्थानीय स्रोतों के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है। AI से त्रुटियाँ संभव हैं और इस सामग्री की सटीकता या प्रामाणिकता की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। TheAinak केवल सूचनाओं का संकलन करता है और इसकी विषय-वस्तु के लिए उत्तरदायी नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने या उसके आधार पर कोई कार्रवाई करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य कर लें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button