विमल कुमार परिमल की पुस्तक ‘मानस के प्रसंग और पात्र’ का लोकार्पण: रामचरितमानस के शाश्वत मूल्यों पर गहन चिंतन
मुजफ्फरपुर में रविवार को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के अवकाशप्राप्त राजभाषा अधिकारी विमल कुमार परिमल द्वारा लिखित पुस्तक ‘मानस के प्रसंग और पात्र’ का लोकार्पण किया गया। आमगोला स्थित शुभानंदी परिसर के प्रतिभा सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने रामचरितमानस के व्यापक और शाश्वत सार तत्व को समकालीन संदर्भों में प्रस्तुत करने वाली इस कृति की सराहना की।
साहित्यकार डॉ. संजय पंकज ने पुस्तक का लोकार्पण करते हुए कहा कि ‘मानस के प्रसंग और पात्र’ भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों की आचार संहिता को दर्शाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि रामचरितमानस के सभी पात्र जीवन जीने की कला सिखाते हैं। डॉ. पंकज ने लेखक विमल कुमार परिमल के प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने मानस के प्रेरक प्रसंगों को गंभीरतापूर्वक उजागर करते हुए चरित्र निर्माण के अनुरूप प्रतिपादित किया है।
मुख्य वक्ता डॉ. पूनम सिन्हा ने पुस्तक के गहन विश्लेषण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विमल कुमार परिमल ने मानस के प्रसंगों का बारीकी से विश्लेषण किया है। उन्होंने इस पुस्तक को जीवन जीने का सूत्र बताने वाली एक महत्वपूर्ण कृति बताया। डॉ. त्रिविक्रम नारायण सिंह ने टिप्पणी की कि लेखक ने मानस विषयक प्रसंगों को एक विवेकपूर्ण विमर्श का रूप दिया है, जो पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
उदयनारायण सिंह ने मानस की महिमा का समाजीकरण करने के लिए विमल कुमार परिमल को साधुवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक समाज में रामचरितमानस के संदेश को फैलाने में सहायक होगी। डॉ. रणवीर राजन ने लेखक के संवेदनात्मक दृष्टिकोण की प्रशंसा करते हुए कहा कि मानस चिंतन में यह एक नया आयाम जोड़ता है।
कार्यक्रम में उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों में विनोद कुमार सिन्हा, एचएल गुप्ता, श्रीमन्नारायण और डॉ. अनु शांडिल्य शामिल थे। इन सभी ने पुस्तक की उपयोगिता पर प्रकाश डाला और वर्तमान परिवेश में इसकी प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब मानवीय मूल्यों का क्षरण हो रहा है, ऐसी पुस्तकें समाज को सही दिशा दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
लेखक विमल कुमार परिमल ने अपने रचनात्मक विकास में परिवार, समाज और परिवेश के योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक उनके वर्षों के चिंतन और अध्ययन का परिणाम है, और उन्हें उम्मीद है कि यह पाठकों को रामचरितमानस के गहरे अर्थों को समझने में मदद करेगी। यह लोकार्पण समारोह मुजफ्फरपुर के साहित्यिक और सांस्कृतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण घटना रही, जिसने रामचरितमानस के शाश्वत संदेश को एक बार फिर रेखांकित किया।
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