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मुजफ्फरपुर: जेल के कैदियों के हुनर को मिलेगी नई पहचान, खादी मॉल में खुलेगा ‘मुक्ति’ उत्पादों का स्टॉल

मुजफ्फरपुर के खादी मॉल में अब मिलेंगे जेल के कैदियों द्वारा निर्मित शुद्ध उत्पाद

मुजफ्फरपुर के शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा में बंद कैदियों के हुनर और मेहनत अब शहर के मुख्य बाजार तक पहुंच रही है। जेल प्रशासन की एक अनूठी पहल के तहत, अब शहर के खादी मॉल में एक विशेष स्टॉल की शुरुआत की जा रही है। इस स्टॉल पर जेल के भीतर कैदियों द्वारा तैयार किए गए शुद्ध और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद आम लोगों के लिए उपलब्ध होंगे।

क्या-क्या मिलेगा स्टॉल पर?

जेल के कारखानों में कैदियों द्वारा पूरी शुद्धता के साथ तैयार किए गए कई उत्पाद इस स्टॉल की शोभा बढ़ाएंगे। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • शुद्ध कच्ची घानी सरसों तेल
  • हल्दी, धनिया और मिर्च पाउडर जैसे मसाले
  • शुद्ध चने का सत्तू और भुना हुआ भुजा
  • फिनाइल और कपड़े धोने का साबुन
  • जीरा और गोल मिर्च

जेल प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में कैदियों द्वारा तैयार किए गए बेहतरीन लकड़ी के फर्नीचर भी यहां बिक्री के लिए रखे जाएंगे। इस स्टॉल का औपचारिक उद्घाटन जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन द्वारा जल्द ही किया जाएगा।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

केंद्रीय कारा में बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर औद्योगिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। वर्तमान में 684 से अधिक बंदी जेल परिसर के भीतर विभिन्न इकाइयों में काम कर रहे हैं। कोई मसाला पीसने की मशीन संभाल रहा है, तो कोई तेल निकालने या साबुन-फिनाइल बनाने में जुटा है। इन कैदियों को उनके काम के बदले पारिश्रमिक भी दिया जाता है। वर्ष 2025 में कैदियों को एक करोड़ 20 लाख आठ हजार 521 रुपये का पारिश्रमिक दिया गया, जिससे वे अपने परिवारों की आर्थिक मदद करने में सक्षम हुए हैं।

मुक्ति बाजार की सफलता के बाद विस्तार

जेल के मुख्य द्वार के पास स्थित ‘मुक्ति बाजार’ की अपार सफलता को देखते हुए खादी मॉल में यह स्टॉल खोलने का निर्णय लिया गया है। मुक्ति बाजार में शुद्धता की गारंटी के कारण शहरवासियों की भारी भीड़ उमड़ती है। जेल अधीक्षक यूसुफ रिजवान के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य कैदियों के पुनर्वास को बढ़ावा देना है। जेल में तैयार उत्पाद पूरी तरह से केमिकल-मुक्त और शुद्ध होते हैं। इस विस्तार से न केवल शहर के लोगों को शुद्ध सामान मिलेगा, बल्कि इससे होने वाली आय का उपयोग कैदियों के कल्याण और जेल के कारखानों को और अधिक आधुनिक बनाने में किया जाएगा।


अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध स्थानीय स्रोतों के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है। AI से त्रुटियाँ संभव हैं और इस सामग्री की सटीकता या प्रामाणिकता की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। TheAinak केवल सूचनाओं का संकलन करता है और इसकी विषय-वस्तु के लिए उत्तरदायी नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने या उसके आधार पर कोई कार्रवाई करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य कर लें।

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