एसकेएमसीएच में स्वास्थ्य मंत्री का घेराव: छात्रों, डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों का फूटा आक्रोश
मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसकेएमसीएच) में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के दौरे के दौरान भारी हंगामा देखने को मिला। छात्रों, जूनियर डॉक्टरों और मरीजों के परिजनों ने अपनी विभिन्न मांगों और अव्यवस्थाओं को लेकर मंत्री का घेराव किया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि मंत्री को पीछे के रास्ते से बाहर निकालना पड़ा और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को सख्ती बरतनी पड़ी।
छात्रों का प्रदर्शन: परीक्षा टालने की मांग
एसकेएमसीएच और आरडीजेएम मेडिकल कॉलेज के 2024 बैच के एमबीबीएस छात्रों ने पीकू (पीआईसीयू) में जोरदार प्रदर्शन किया। वे 15 सितंबर से प्रस्तावित अपनी परीक्षा को कम से कम एक महीने आगे बढ़ाने की मांग कर रहे थे। छात्रों का आरोप है कि उन्हें पूरे साल की पढ़ाई के बजाय केवल छह से सात महीने में ही पाठ्यक्रम पूरा कराया जा रहा है, जबकि थ्योरी और प्रैक्टिकल का सिलेबस अभी भी अधूरा है। उनका कहना था कि कम समय में परीक्षा थोपे जाने से उनकी तैयारी प्रभावित हो रही है। कई छात्र अभी हाल ही में सप्लीमेंट्री परीक्षा देकर लौटे हैं और उन्हें भी पर्याप्त तैयारी का मौका नहीं मिला है। छात्रों ने बताया कि उन्होंने बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज में परीक्षा स्थगित करने के लिए कई बार आवेदन दिया, लेकिन केवल आश्वासन ही मिला। मंत्री से मिलने से रोके जाने पर छात्रों का गुस्सा भड़क गया और पीकू में हंगामा शुरू हो गया। इस दौरान सिटी एसपी और एसडीओ पूर्वी के साथ भी धक्का-मुक्की की गई।
जूनियर डॉक्टरों की नाराजगी: मानदेय वृद्धि की मांग
स्वास्थ्य मंत्री के दौरे के दौरान जूनियर डॉक्टरों में भी भारी नाराजगी देखी गई। नॉन-एकेडमिक जूनियर रेजिडेंट डॉ. अभिषेक कुमार वर्मा ने बताया कि डॉक्टरों को मंत्री से बातचीत के लिए प्रिंसिपल चैंबर में बैठाया गया था, लेकिन मंत्री वहां पहुंचे ही नहीं और महज 15-20 मिनट अस्पताल में रुककर बिना उनकी समस्याएं सुने ही रवाना हो गए। डॉक्टरों की सबसे बड़ी मांग मानदेय बढ़ाने की है। उनका आरोप है कि वर्ष 2019 के बाद से पिछले सात वर्षों में उनके मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। वर्तमान में लगभग 65 हजार रुपए मानदेय निर्धारित है, जिसमें कटौती के बाद उन्हें लगभग 58,500 रुपए मिलते हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो वे पटना जाकर सरकार के समक्ष मुद्दा उठाएंगे और आंदोलन की रणनीति बनाएंगे। नर्सिंग स्टाफ ने भी पुरानी पेंशन योजना लागू करने और ड्यूटी की उम्र सीमा 65 साल करने की मांग की।
मरीज के परिजनों का आक्रोश: इलाज में लापरवाही का आरोप
मंत्री के अस्पताल में मौजूद रहने के दौरान ही इमरजेंसी में इलाज की व्यवस्था को लेकर मरीज के परिजनों का आक्रोश भी सामने आया। गायघाट निवासी हरिशंकर राय पैर टूटने के बाद इलाज कराने इमरजेंसी पहुंचे थे। परिजनों का आरोप था कि काफी देर तक मरीज को देखने के लिए कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं था और मरीज को इमरजेंसी तक ले जाने के लिए ट्रॉलीमैन भी नहीं मिला। स्थिति बिगड़ने के बाद परिजन मरीज को निजी अस्पताल ले जाने पर मजबूर हुए।
आईसीयू उद्घाटन और बोचहां विधायक की अनुपस्थिति
इस बीच, नई आईसीयू के लोकार्पण कार्यक्रम में बोचहां विधायक बेबी कुमारी को निमंत्रण नहीं मिलने का मामला भी चर्चा में रहा। विधायक का कहना है कि उन्हें किसी स्तर से औपचारिक निमंत्रण नहीं मिला, इसलिए वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकीं। हालांकि, एसकेएमसीएच अधीक्षक प्रो. डॉ. महेश प्रसाद ने स्पष्ट किया कि यह सरकार का कार्यक्रम था और आयोजन की व्यवस्था व अतिथियों को आमंत्रित करने की जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन के पास नहीं थी।
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