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गनियाबाड़ी में पोषण वाटिका का मंत्र: अब घर के आंगन में उगेगी सेहत, किसानों को मिली नई तकनीक

किशनगंज के गनियाबाड़ी गांव में कुपोषण को जड़ से मिटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय, अर्राबाड़ी की ओर से आयोजित एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में ग्रामीणों को न केवल वैज्ञानिक खेती के गुर सिखाए गए, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए बीज किट भी उपलब्ध कराए गए। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को पोषण सुरक्षा के प्रति जागरूक करना और उन्हें अपने घरों में ‘पोषण वाटिका’ विकसित करने के लिए प्रेरित करना था।

पोषण वाटिका: सेहत और बचत का जरिया

कार्यक्रम में शामिल हुए 50 से अधिक ग्रामीणों को विशेषज्ञों ने बताया कि कैसे घर के छोटे से हिस्से में पोषण वाटिका लगाकर परिवार को ताजी और रसायन मुक्त सब्जियां मिल सकती हैं। विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि बाजार पर निर्भरता कम करने और परिवार को कुपोषण से बचाने के लिए घर-घर में पोषण वाटिका का होना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

वैज्ञानिक खेती से बढ़ेगा रोजगार

प्रशिक्षण सत्र के दौरान महाविद्यालय के वैज्ञानिकों ने सब्जी उत्पादन की आधुनिक तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की। इसमें निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया गया:

  • सब्जी उत्पादन की वैज्ञानिक पद्धतियां और उन्नत बीज चयन।
  • सब्जियों से मूल्य संवर्धित उत्पाद (Value Added Products) तैयार करने की विधि।
  • सब्जी की खेती को स्वरोजगार और आजीविका का जरिया कैसे बनाएं।
  • मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के साथ कम लागत में अधिक पैदावार।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. के सत्यनारायण ने कहा कि पोषण युक्त भोजन ही स्वस्थ समाज की नींव है। उन्होंने ग्रामीणों को प्रोत्साहित किया कि वे अपनी खाली पड़ी जमीन का उपयोग पोषण वाटिका के लिए करें। वहीं, डॉ. शफी अफरोज, डॉ. कृष्णा डी.के., डॉ. केविन क्रिस्टोफर, डॉ. घनश्याम ठाकुर और डॉ. अंजलि सुधाकर ने तकनीकी पहलुओं को सरल भाषा में समझाते हुए खेती के दौरान आने वाली चुनौतियों का समाधान भी बताया।

बीज किट का वितरण

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी ग्रामीणों के बीच बीज किट का वितरण किया गया। इन किट्स का उद्देश्य ग्रामीणों को तुरंत खेती शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के जमीनी स्तर के प्रयास न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण की समस्या को कम करेंगे, बल्कि आर्थिक रूप से भी परिवारों को संबल प्रदान करेंगे। गनियाबाड़ी के ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत किया और अपने घरों में पोषण वाटिका लगाने का संकल्प लिया।


अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध स्थानीय स्रोतों के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है। AI से त्रुटियाँ संभव हैं और इस सामग्री की सटीकता या प्रामाणिकता की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। TheAinak केवल सूचनाओं का संकलन करता है और इसकी विषय-वस्तु के लिए उत्तरदायी नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने या उसके आधार पर कोई कार्रवाई करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य कर लें।

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