फर्जी जख्म प्रतिवेदन मामले में दो डॉक्टरों सहित सात पर FIR, कोर्ट के आदेश पर ब्रह्मपुरा थाने में दर्ज हुआ मामला
मुजफ्फरपुर में एक निजी अस्पताल के दो डॉक्टरों समेत सात व्यक्तियों के खिलाफ ब्रह्मपुरा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह कार्रवाई कोर्ट के आदेश पर फर्जी जख्म प्रतिवेदन जारी करने के आरोप में की गई है। इस मामले की जांच ब्रह्मपुरा थाने की दारोगा प्रेमा कुमारी को सौंपी गई है।
मामला बोचहां थाने के राघो मझौली निवासी अभय कुमार द्वारा कोर्ट में दायर परिवाद से जुड़ा है। अभय ने आरोप लगाया था कि उनके केस को गंभीर बनाने के उद्देश्य से आपराधिक षड्यंत्र के तहत एक फर्जी और मनगढ़ंत जख्म प्रतिवेदन तैयार किया गया है। उन्होंने डॉ. पंकज कुमार को मुख्य आरोपी बनाया है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने एक निजी अस्पताल का चिकित्सक बताकर अपने लेटर हेड पर फर्जी जख्म प्रतिवेदन जारी किया। इसी फर्जी प्रतिवेदन के आधार पर बोचहां पीएचसी के चिकित्सा अधिकारी ने जख्म को गंभीर बताते हुए बोचहां थाने को रिपोर्ट भेजी थी।
प्राथमिकी में यह भी बताया गया है कि डॉ. पंकज कुमार नाम का कोई भी व्यक्ति उस निजी अस्पताल के डॉक्टरों की सूची में शामिल नहीं है। वह वास्तव में बंदरा पीएचसी में कार्यरत एक चिकित्सक हैं। जब अभय कुमार को इस धोखाधड़ी का पता चला कि आरोपियों ने केस को गंभीर बनाने के लिए फर्जी जख्म प्रतिवेदन तैयार कर जांच अधिकारी (IO) को दिया है, तो उन्होंने तुरंत मुजफ्फरपुर के चिकित्सा अधिकारी और ग्रामीण एसपी से न्याय की गुहार लगाई।
ग्रामीण एसपी ने अभय के आवेदन की गंभीरता को देखते हुए बोचहां थानेदार को जांच का निर्देश दिया। बोचहां थानेदार ने अपनी रिपोर्ट में ग्रामीण एसपी को बताया कि उन्होंने जख्मी व्यक्तियों से पूछताछ की और उनके जख्मों का निरीक्षण किया, तो जख्म साधारण प्रकृति के लगे। हालांकि, डॉक्टर ने उन्हें गंभीर बताया था। थानेदार ने अपनी रिपोर्ट में जख्मियों की दोबारा जांच कराने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्राथमिकी में यह भी उल्लेख है कि बोचहां पीएचसी के चिकित्सा अधिकारी ने जख्म प्रतिवेदन में जख्म की लंबाई 2.5 सेमी बताई थी, जबकि डॉ. पंकज ने इसी जख्म को गंभीर दिखाने के लिए उसकी लंबाई 4 सेमी बताई। कोर्ट ने अभय के परिवाद को अत्यंत गंभीर मानते हुए ब्रह्मपुरा थानेदार को तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर विधिवत जांच शुरू करने का आदेश दिया। ब्रह्मपुरा थानेदार विपिन रंजन ने पुष्टि की है कि इस मामले में डॉ. पंकज कुमार, एक सीटी स्कैन सेंटर के डॉ. मनोज कुमार और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। यह घटना चिकित्सा क्षेत्र में फर्जीवाड़े और आपराधिक षड्यंत्र की ओर इशारा करती है, जिसकी गहन जांच आवश्यक है।
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