बिहार में फर्जी पासपोर्ट रैकेट का भंडाफोड़: मुजफ्फरपुर से पटना तक जांच तेज
बिहार में फर्जी पहचान पत्रों के आधार पर विदेशी नागरिकों द्वारा भारतीय पासपोर्ट बनवाने वाले एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने मुजफ्फरपुर, पटना और खगड़िया जिलों में अपनी जांच तेज कर दी है। यह खुलासा राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाला मामला मुजफ्फरपुर से सामने आया है। यहां एक बांग्लादेशी नागरिक, मोहम्मद बेलाल हसन भुइयां, ने मोहम्मद आफताब के नाम से भारतीय पासपोर्ट बनवा लिया। उसने दीवान रोड, मुजफ्फरपुर का पता इस्तेमाल किया था। बुधवार को विशेष शाखा की एक टीम जब इस मामले के सत्यापन के लिए नगर थाना क्षेत्र के कल्याणी बाड़ा पहुंची, तो मोहम्मद बेलाल हसन भुइयां वहां से गायब मिला।
स्थानीय निवासियों के खुलासे
स्थानीय निवासियों ने जांच टीम को बताया कि बेलाल पहले इस इलाके में किराए पर रहता था। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि नगर पुलिस ने उसे पहले किसी मामले में पकड़ा भी था, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया गया था। यह तथ्य पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है कि एक विदेशी नागरिक, जिसे पहले पकड़ा गया था, वह कैसे फर्जी पहचान के साथ पासपोर्ट बनवाने में सफल रहा और फिर गायब हो गया।
इस रैकेट की परतें खुलने के साथ ही यह बात सामने आई है कि इसमें 31 अफगान नागरिक और 2 बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं, जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारतीय पासपोर्ट हासिल किए। इनमें से 29 अफगान नागरिकों का पता पटना में दर्ज है, जबकि एक बांग्लादेशी नागरिक मुजफ्फरपुर में ‘बेलाल’ से ‘आफताब’ बन गया। यह दर्शाता है कि यह रैकेट कितना व्यापक और संगठित है, जिसकी जड़ें राज्य के कई प्रमुख शहरों तक फैली हुई हैं।
पुलिस मुख्यालय अब इस मामले की तह तक जाने के लिए गहन जांच कर रहा है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस रैकेट में कौन-कौन लोग शामिल हैं, उन्हें किसने मदद की और फर्जी पहचान पत्र तथा पासपोर्ट बनवाने की पूरी प्रक्रिया कैसे अंजाम दी गई। इस घटना ने राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि विदेशी नागरिकों द्वारा फर्जी पहचान पर भारतीय पासपोर्ट प्राप्त करना देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा हो सकता है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी कई खुलासे होने की संभावना है, जिससे इस बड़े रैकेट के पीछे के चेहरों को बेनकाब किया जा सकेगा।
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