बीआरएबीयू में अब दो साल में पूरी होगी एमसीए की पढ़ाई, सिंडिकेट ने दी मंजूरी
बदलाव की तैयारी: बीआरएबीयू में एमसीए कोर्स की अवधि घटी
मुजफ्फरपुर स्थित बीआरए बिहार विश्वविद्यालय (बीआरएबीयू) में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने एमसीए (मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन) पाठ्यक्रम को तीन साल से घटाकर दो साल करने का निर्णय लिया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से यह नया बदलाव प्रभावी हो जाएगा, जिससे छात्रों को अपना पोस्ट-ग्रेजुएशन पूरा करने में एक साल की बचत होगी।
सिंडिकेट की बैठक में बनी सहमति
हाल ही में आयोजित सिंडिकेट की बैठक में इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में मौजूद सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में पहले से ही दो वर्षीय एमसीए पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं, जबकि बीआरएबीयू में अब तक पुराना तीन वर्षीय ढांचा ही लागू था। इस विसंगति को दूर करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने आर्डिनेंस और रेगुलेशन तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जल्द ही इसे लोकभवन (राजभवन) के पास स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
एकेडमिक काउंसिल में अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय की अध्यक्षता में हुई एकेडमिक काउंसिल की बैठक में केवल एमसीए ही नहीं, बल्कि स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के कई अन्य शैक्षणिक सुधारों पर भी मुहर लगाई गई। बैठक के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के लिए एग्जिट पॉलिसी और नए सिलेबस को मंजूरी।
- स्नातक चौथे सेमेस्टर के लिए एनएसएस कोर्स स्ट्रक्चर और क्रासवर्ड सिलेबस का निर्धारण।
- आठवें सेमेस्टर के रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए नई गाइडलाइन तैयार करना।
- एग्जिट पॉइंट पर इंटर्नशिप की रूपरेखा और एईडीपी कोर्स के नियमों को अंतिम रूप देना।
शैक्षणिक सुधारों पर जोर
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लोकभवन से प्राप्त नए सिलेबस और नियमों को लागू करने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। बैठक के दौरान पीजी के एक और दो वर्षीय पाठ्यक्रमों के लिए एईसीसी (AECC) और जनरल इलेक्टिव कोर्स के सिलेबस को लेकर भी चर्चा हुई। सदस्यों ने सुझाव दिया कि सभी कॉलेजों में पीजी सेंटर स्थापित किए जाएं ताकि छात्रों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिल सकें।
यह बदलाव न केवल छात्रों के समय की बचत करेगा, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर के अन्य विश्वविद्यालयों के समकक्ष खड़ा करने में भी मदद करेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द इन नई नीतियों को धरातल पर उतारा जाए ताकि आगामी सत्र से छात्रों को इसका लाभ मिल सके।
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