मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड: अपनों की तलाश में दर-दर भटक रहे परिजन, जमीन बेचकर चुकाए थे 3 लाख
अस्पताल में मची अफरातफरी के बीच अपनों को ढूंढते परिजन
मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल में लगी भीषण आग ने न केवल संपत्ति का नुकसान किया है, बल्कि कई परिवारों की उम्मीदों को भी राख कर दिया है। घटना के बाद से ही अस्पताल परिसर में अपने परिजनों की तलाश में भटक रहे लोगों का दर्द किसी से छिपा नहीं है। स्थिति इतनी भयावह है कि कई लोग घंटों बीत जाने के बाद भी अपने मरीजों की स्थिति जानने के लिए तरस रहे हैं।
जमीन बेचकर जुटाई थी इलाज की रकम
पीड़ित परिवारों का कहना है कि उन्होंने अपने मरीज के इलाज के लिए अपनी जमा-पूंजी और जमीन तक बेच दी थी। एक पीड़ित परिजन ने बताया कि उन्होंने इलाज के नाम पर अस्पताल में 3 लाख रुपये जमा किए थे, लेकिन आग लगने के बाद से ही उनके मरीज का कोई अता-पता नहीं है। अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी न मिलने के कारण परिजनों का गुस्सा और डर लगातार बढ़ता जा रहा है।
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
अस्पताल में आग लगने के बाद मची भगदड़ और अव्यवस्था ने सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के बाद मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कोई ठोस योजना नहीं थी, जिसके कारण कई मरीज इधर-उधर बिखर गए। अब परिजन अस्पताल के हर कोने में अपने अपनों को ढूंढ रहे हैं, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है।
- अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों का आरोप है कि उन्हें सही जानकारी नहीं दी जा रही है।
- आर्थिक तंगी झेल रहे परिवारों के लिए यह घटना किसी बड़े सदमे से कम नहीं है।
- प्रशासनिक स्तर पर लापता मरीजों की सूची जारी करने की मांग तेज हो गई है।
फिलहाल, स्थानीय प्रशासन और पुलिस मामले की जांच में जुटी है, लेकिन उन परिवारों के लिए समय थम सा गया है जिन्होंने अपने इलाज के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया था। जब तक लापता मरीजों की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिलती, तब तक अस्पताल परिसर में परिजनों का यह दर्दनाक इंतजार जारी रहेगा।
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