मुजफ्फरपुर: एनटीपीसी कांटी में 50 बेटियों के लिए शुरू हुआ ‘बालिका सशक्तीकरण अभियान’, अब हुनर से संवरेगी तकदीर
बेटियों के सपनों को नई उड़ान
मुजफ्फरपुर के एनटीपीसी कांटी परियोजना परिसर में इन दिनों एक विशेष पहल चर्चा का विषय बनी हुई है। ‘सशक्त बालिका, सशक्त कांटी’ के विजन के साथ यहाँ ‘बालिका सशक्तीकरण अभियान-2026’ का आगाज किया गया है। इस अनूठी पहल के जरिए कांटी प्रखंड के विभिन्न गांवों और सरकारी स्कूलों से चुनी गई 50 मेधावी लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर बच्चियों को एक महीने का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
क्या है इस अभियान का उद्देश्य?
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चियों का सर्वांगीण विकास करना है। 26 मई से 20 जून तक चलने वाले इस कैंप में बच्चियों को शिक्षा के साथ-साथ जीवन के हर क्षेत्र में निपुण बनाने की तैयारी है। एनटीपीसी प्रबंधन ने इन बच्चियों के रहने, खाने और पढ़ाई-लिखाई का पूरा जिम्मा उठाया है, ताकि वे बिना किसी चिंता के अपने हुनर को निखार सकें।
हुनर और शिक्षा का संगम
प्रशिक्षण कार्यक्रम को बेहद व्यापक रूप दिया गया है। इसमें शामिल हैं:
- शैक्षणिक विकास: गणित, अंग्रेजी, हिंदी और विज्ञान जैसे विषयों पर विशेष कक्षाएं।
- कला और संस्कृति: नृत्य, संगीत और पेंटिंग के जरिए रचनात्मकता को बढ़ावा।
- आत्मरक्षा और स्वास्थ्य: मार्शल आर्ट और योग का प्रशिक्षण, ताकि बेटियां शारीरिक रूप से मजबूत बन सकें।
- तकनीकी ज्ञान: आधुनिक युग की जरूरत को देखते हुए कंप्यूटर शिक्षा।
परियोजना प्रमुख संजीब कुमार सुआर ने दीप प्रज्वलित कर इस अभियान का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि एनटीपीसी कांटी का प्रयास है कि ये बेटियां न केवल शिक्षित हों, बल्कि उनमें आत्मविश्वास का संचार हो ताकि वे भविष्य में समाज के लिए एक मिसाल बन सकें।
बदलाव की एक नई शुरुआत
सीएसआर (CSR) विभाग की ओर से चुनी गई इन 50 बच्चियों के लिए यह एक महीने का सफर उनके व्यक्तित्व में बड़ा बदलाव लाने वाला है। मानव संसाधन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि 28 दिनों का यह गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम इन बच्चियों को अधिक जागरूक और आत्मनिर्भर बनाएगा। यह पहल न केवल उन बच्चियों के लिए, बल्कि उनके परिवारों और पूरे समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश है। एनटीपीसी कांटी की यह कोशिश है कि शिक्षा और कौशल के मेल से इन बेटियों को जीवन की मुख्यधारा में मजबूती से खड़ा किया जा सके।
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