मुजफ्फरपुर में बंगाली दुर्गा पूजा समिति ने मनाई कोजागरी लक्ष्मी पूजा, हरिसभा परिसर में दिखा उत्साह
मुजफ्फरपुर में बंगाली समुदाय द्वारा कोजागरी लक्ष्मी पूजा का आयोजन बड़े ही धूमधाम और पारंपरिक श्रद्धा के साथ किया गया। यह आयोजन हरिसभा मध्य विद्यालय परिसर में बंगाली दुर्गा पूजा समिति द्वारा किया गया, जिसमें शहर के बंगाली समुदाय के सदस्यों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस विशेष अवसर पर, देवी लक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और शांति की कामना की गई।
कोजागरी लक्ष्मी पूजा, जिसे बंगाली समुदाय में ‘कोजागरी पूर्णिमा’ के नाम से भी जाना जाता है, दुर्गा पूजा के ठीक बाद आने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह मान्यता है कि इस रात देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जो लोग जागकर उनकी पूजा करते हैं, उन्हें आशीर्वाद देती हैं। इसी कारण इस पूजा को ‘कोजागरी’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है ‘कौन जाग रहा है’।
हरिसभा मध्य विद्यालय परिसर में आयोजित इस पूजा के लिए पूरे पंडाल को पारंपरिक बंगाली शैली में सजाया गया था। रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजे पंडाल में देवी लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित की गई। पूजा के अनुष्ठान सुबह से ही शुरू हो गए थे, जिसमें पुरोहितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजा-अर्चना की गई। शाम होते-होते परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया, जो देवी के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पहुंचे थे।
समिति के सदस्यों ने बताया कि यह आयोजन हर साल किया जाता है और इसका मुख्य उद्देश्य बंगाली संस्कृति और परंपरा को बनाए रखना है। उन्होंने यह भी बताया कि पूजा के दौरान प्रसाद वितरण का भी विशेष प्रबंध किया गया था। विभिन्न प्रकार के पारंपरिक बंगाली पकवान और मिठाइयां प्रसाद के रूप में बांटी गईं, जिसका श्रद्धालुओं ने आनंद लिया।
पूजा के दौरान भजन-कीर्तन का भी आयोजन किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। महिलाओं ने पारंपरिक साड़ी पहनकर पूजा में भाग लिया और शंख ध्वनि के साथ देवी लक्ष्मी का आह्वान किया। बच्चों और युवाओं में भी इस त्योहार को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह समुदाय के लोगों को एक साथ आने और अपनी संस्कृति का जश्न मनाने का अवसर भी प्रदान करता है।
देर रात तक चले इस आयोजन में मुजफ्फरपुर के बंगाली समुदाय की एकता और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सभी ने मिलकर देवी लक्ष्मी से शहर और देश की खुशहाली की प्रार्थना की। इस सफल आयोजन के साथ, बंगाली दुर्गा पूजा समिति ने एक बार फिर अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने का संदेश दिया।
अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध स्थानीय स्रोतों के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है। AI से त्रुटियाँ संभव हैं और इस सामग्री की सटीकता या प्रामाणिकता की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। TheAinak केवल सूचनाओं का संकलन करता है और इसकी विषय-वस्तु के लिए उत्तरदायी नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने या उसके आधार पर कोई कार्रवाई करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य कर लें।
