स्थानीय

मुजफ्फरपुर में मानसून की पहली दस्तक: जर्जर बिजली व्यवस्था और ओवरलोड ट्रांसफॉर्मर से बेहाल शहर

मुजफ्फरपुर में बिजली व्यवस्था की खुली पोल

मानसून की पहली बारिश और हल्की हवाओं ने मुजफ्फरपुर की बिजली व्यवस्था की हकीकत सामने ला दी है। करोड़ों रुपये के मेंटेनेंस और नेटवर्क सुदृढ़ीकरण के दावों के बावजूद, शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बिजली आपूर्ति चरमरा गई है। हल्की आंधी आते ही पोल गिरने और तारों के टूटने का सिलसिला शुरू हो जाता है, जिससे लोगों को घंटों अंधेरे में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।

दावों और हकीकत का अंतर

विभाग हर साल मानसून से पहले लाइनों की मरम्मत, पेड़ों की छंटाई और इंसुलेटर बदलने का दावा करता है। इन कार्यों पर भारी-भरकम बजट खर्च किया जाता है, लेकिन मानसून की पहली आहट के साथ ही ये दावे खोखले साबित हो रहे हैं। वही पुराने पोल और जर्जर तार हर साल मुसीबत का सबब बनते हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि बार-बार शिकायत के बाद भी समय पर राहत नहीं मिल पाती है।

बिजली संकट से जनजीवन प्रभावित

बिजली की इस बदहाली का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है। अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल आपूर्ति, छोटे उद्योग और सरकारी कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। भीषण गर्मी और उमस के बीच बिजली कट ने आम लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। विद्युत उपभोक्ता मंच के पदाधिकारियों का मानना है कि केवल अस्थायी मरम्मत से काम नहीं चलेगा। जब तक पुराने तारों को नहीं बदला जाएगा और ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता में वृद्धि नहीं की जाएगी, तब तक यह संकट हर साल दोहराया जाएगा।

विभाग का पक्ष

इस मामले पर शहरी डिवीजन-1 के कार्यपालक अभियंता विजय कुमार का कहना है कि आंधी-पानी जैसी प्राकृतिक आपदाओं पर किसी का नियंत्रण नहीं होता। उन्होंने बताया कि मेंटेनेंस एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और विभाग की टीम पूरी कोशिश करती है कि उपभोक्ताओं को कम से कम परेशानी हो। हालांकि, रात के समय और खराब मौसम में बिजली बहाल करने में व्यावहारिक चुनौतियां आती हैं।

आगे की राह

मुजफ्फरपुर में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन वितरण नेटवर्क उस रफ्तार से विकसित नहीं हो पाया है। कई जगहों पर पोल झुक चुके हैं और तारों की उम्र पूरी हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब समय आ गया है कि विभाग आधुनिक और मजबूत वितरण नेटवर्क तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करे, ताकि शहर को निर्बाध बिजली मिल सके।


अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध स्थानीय स्रोतों के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है। AI से त्रुटियाँ संभव हैं और इस सामग्री की सटीकता या प्रामाणिकता की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। TheAinak केवल सूचनाओं का संकलन करता है और इसकी विषय-वस्तु के लिए उत्तरदायी नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने या उसके आधार पर कोई कार्रवाई करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य कर लें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button