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मुजफ्फरपुर से पटना का सफर: ट्रेनों की कमी से यात्रियों की ‘जंग’, बस के मनमाने किराए से जेब पर डाका

राजधानी तक पहुंचना बना चुनौती

मुजफ्फरपुर से पटना की दूरी महज 75 किलोमीटर है, लेकिन इस छोटे से सफर को तय करना स्थानीय यात्रियों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। ट्रेनों की भारी किल्लत के कारण रोजाना हजारों यात्रियों को या तो खचाखच भरी ट्रेनों में जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ता है या फिर निजी बसों के मनमाने किराए के आगे झुकना पड़ता है।

ट्रेनों का टोटा और बसों की मनमानी

आंकड़ों के अनुसार, मुजफ्फरपुर से पटना जंक्शन के लिए सीधी ट्रेनों का अभाव है। अधिकांश ट्रेनें पाटलिपुत्र, दानापुर या आरा की ओर जाती हैं। इन स्टेशनों पर उतरने के बाद यात्रियों को पटना जंक्शन, सचिवालय या पीएमसीएच पहुंचने के लिए अतिरिक्त ऑटो या बस लेनी पड़ती है, जिससे न केवल 50 से 80 रुपये का अतिरिक्त खर्च होता है, बल्कि एक घंटे का समय भी बर्बाद होता है। ट्रेन का किराया जहां 50 रुपये के आसपास है, वहीं बस संचालक यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाकर 130 से 150 रुपये तक वसूल रहे हैं।

यात्रियों का दर्द और सुरक्षा पर सवाल

दैनिक यात्रियों, छात्रों और मरीजों का कहना है कि यदि सुबह और शाम के समय पटना जंक्शन के लिए दो-तीन नई मेमू या इंटरसिटी ट्रेनें मिल जाएं, तो बड़ी राहत मिलेगी। वर्तमान में चल रही ट्रेनों में भीड़ इतनी अधिक होती है कि पैर रखने की जगह नहीं मिलती। इसके अलावा, सुरक्षा का मुद्दा भी गंभीर है। शाम ढलते ही ट्रेनों में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा हो जाता है और आरपीएफ-जीआरपी की गश्त नदारद रहती है। चेन स्नेचिंग और जबरन सीट कब्जाने जैसी घटनाएं आम हो गई हैं, जिससे महिला और बुजुर्ग यात्रियों में डर का माहौल रहता है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार?

यात्रियों की इस समस्या पर मुजफ्फरपुर के सांसद और केंद्रीय जलशक्ति राज्यमंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी ने संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा है कि वे रेलमंत्री से मिलकर मुजफ्फरपुर से पटना जंक्शन के लिए नई ट्रेनों के परिचालन की मांग रखेंगे। साथ ही, जंक्शन पर यात्री सुविधाओं और स्वच्छता को लेकर भी रेलवे के उच्च अधिकारियों से वार्ता की जाएगी।

  • दैनिक यात्रियों की मांग: सुबह 7 बजे और शाम 5 बजे नई ट्रेनें चलें।
  • भीड़ का असर: नई ट्रेनें चलने से जनरल कोच में 60% तक भीड़ कम हो सकती है।
  • सुरक्षा: ट्रेनों में नियमित गश्त और टीटीई की मौजूदगी अनिवार्य हो।

उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम उठाएगा ताकि मुजफ्फरपुर के लोगों का पटना का सफर सुगम और सुरक्षित हो सके।


अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध स्थानीय स्रोतों के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है। AI से त्रुटियाँ संभव हैं और इस सामग्री की सटीकता या प्रामाणिकता की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। TheAinak केवल सूचनाओं का संकलन करता है और इसकी विषय-वस्तु के लिए उत्तरदायी नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने या उसके आधार पर कोई कार्रवाई करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य कर लें।

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