जन्माष्टमी पर मुजफ्फरपुर में गूंजी 55 नवजातों की किलकारी: शुभ मुहूर्त में जन्म की चाहत में बढ़ी सिजेरियन डिलीवरी
मुजफ्फरपुर में इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 55 परिवारों के लिए दोगुनी खुशियां लेकर आया। शुक्रवार को शहर के विभिन्न अस्पतालों में कुल 55 बच्चों ने जन्म लिया, जिनमें 34 लड़के और 21 लड़कियां शामिल हैं। कई माता-पिता ने जन्माष्टमी के शुभ मुहूर्त, विशेषकर रात 12 बजे श्रीकृष्ण जन्म के समय के आसपास, अपने बच्चे का जन्म कराने की इच्छा जताई थी, जिसके चलते नियोजित सिजेरियन डिलीवरी में वृद्धि देखी गई।
शुभ मुहूर्त की चाहत में बढ़ी प्लानिंग
जन्माष्टमी के पावन अवसर पर बच्चे के जन्म को शुभ मानने की परंपरा के कारण कई परिवारों ने डॉक्टरों से सलाह लेकर प्रसव का समय पहले से तय कराया। इसके लिए मेडिकल एडवाइस के बाद प्लान्ड सिजेरियन डिलीवरी का विकल्प भी चुना गया। मेडिवर्स अस्पताल के डॉ. शैलेंद्र कुमार ने बताया कि आजकल कई परिवार शुभ तारीख और मुहूर्त देखकर डिलीवरी प्लान करने की इच्छा रखते हैं, और जन्माष्टमी जैसे धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण दिन पर यह मांग और बढ़ जाती है।
डॉक्टरों के अनुसार, सामान्य प्रसव को किसी निश्चित समय पर कराना संभव नहीं होता क्योंकि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। हालांकि, ऑपरेशन के जरिए होने वाली डिलीवरी में तारीख और समय को डॉक्टर की सलाह के अनुसार प्लान किया जा सकता है। कुछ परिवारों की खास इच्छा थी कि बच्चे का जन्म ठीक रात 12 बजे हो, जिसके लिए चिकित्सकीय परिस्थितियों को देखते हुए समय का समायोजन करने का प्रयास किया गया। कवच हॉस्पिटल के संचालक दिनेश चंद्रा ने भी बताया कि जन्माष्टमी पर उनके यहां कुछ मरीजों ने सिजेरियन के जरिए बच्चे के जन्म की इच्छा जताई थी।
अस्पतालों में नवजातों का आंकड़ा
- केजरीवाल मेटर्निटी अस्पताल: रात 12 बजे से शुक्रवार दोपहर तक 10 बच्चों का जन्म (5 लड़के, 5 लड़कियां), सभी सामान्य प्रसव से।
- एक बड़े निजी अस्पताल: 15 बच्चों का जन्म (8 लड़के, 7 लड़कियां), जिनमें से 6 सिजेरियन से हुए।
- सदर अस्पताल: 10 नवजातों का जन्म (8 लड़के, 2 लड़कियां)।
- एसकेएमसीएच: जन्माष्टमी पर सर्वाधिक 20 बच्चों का जन्म (13 लड़के, 7 लड़कियां)।
इस तरह, उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जन्माष्टमी के दिन इन अस्पतालों में कुल 55 बच्चों की किलकारी गूंजी।
डॉक्टरों और ज्योतिषियों की सलाह
पीडियाट्रिशियन डॉ. राकेश कुमार ने शुभ मुहूर्त के लिए समय से पहले डिलीवरी कराने के प्रति सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि प्री-मैच्योर डिलीवरी से शिशु के फेफड़ों और मस्तिष्क के विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि, यदि प्रसव की तारीख में एक-दो दिन का अंतर हो और मां-बच्चे की स्थिति सामान्य हो, तो डॉक्टर की जांच और सलाह के बाद डिलीवरी की योजना बनाई जा सकती है। केजरीवाल अस्पताल के डॉ. अमरेंद्र कृष्णा ने भी जोर दिया कि बच्चे के जन्म का समय मुख्य रूप से प्राकृतिक प्रक्रिया पर निर्भर करता है और डिलीवरी का निर्णय चिकित्सकीय स्थिति को ध्यान में रखकर ही होना चाहिए।
ज्योतिषाचार्य रमाकांत झा ने बताया कि जन्माष्टमी का दिन सनातन परंपरा में बेहद पवित्र माना जाता है, लेकिन केवल मुहूर्त के मोह में आकर समय से पहले या जबरन सिजेरियन कराने का दबाव बनाना उचित नहीं है। उन्होंने मां और बच्चे की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए चिकित्सकीय सलाह का पालन करने की बात कही।
कुल मिलाकर, जन्माष्टमी के शुभ मुहूर्त में बच्चे के जन्म की चाहत बढ़ी है, लेकिन डॉक्टरों के लिए मां और नवजात की सुरक्षित डिलीवरी ही सबसे बड़ा मुहूर्त है।
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