बाबा गरीबनाथ मंदिर की आय में उछाल: एक साल में चढ़ावे से मिले 1.15 करोड़ रुपये
मुजफ्फरपुर के आस्था केंद्र में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या
मुजफ्फरपुर स्थित बाबा गरीबनाथ मंदिर में आस्था का सैलाब लगातार बढ़ता जा रहा है। इसका सीधा असर मंदिर की आय पर भी देखने को मिल रहा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 (1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026) के दौरान मंदिर को चढ़ावे और पूजन शुल्क के रूप में कुल 1.15 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई है। यह आंकड़ा पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में करीब आठ लाख रुपये अधिक है, जो मंदिर में आने वाले भक्तों की बढ़ती संख्या और उनके अटूट विश्वास को दर्शाता है।
पारदर्शी व्यवस्था और आधुनिक सुविधाएं
मंदिर की आय-व्यय का पूरा प्रबंधन श्री गरीबनाथ मंदिर न्यास समिति द्वारा किया जाता है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पिछले दो वर्षों से मंदिर परिसर में बैंक ऑफ महाराष्ट्र का एक विशेष कलेक्शन सेंटर संचालित किया जा रहा है। इस व्यवस्था के कारण भक्त अब नकद के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यमों से भी आसानी से पूजन शुल्क जमा कर पा रहे हैं। बैंक कर्मचारी प्रतिदिन मंदिर में विभिन्न संस्कारों और पूजा-अर्चना के लिए रसीदें काटते हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है।
दानपेटियों से हर महीने लाखों का संग्रह
मंदिर में रखी दानपेटियों से होने वाली आय भी एक बड़ा स्रोत है। न्यास समिति के अनुसार, हर महीने इन पेटियों से औसतन चार से पांच लाख रुपये की राशि प्राप्त होती है। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक पुख्ता तंत्र बनाया गया है। मंदिर न्यास समिति के उपाध्यक्ष और अनुमंडल पदाधिकारी (पूर्वी) की देखरेख में, प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी की उपस्थिति में हर महीने दानपेटियों को खोला जाता है और राशि की गणना की जाती है।
भक्तों के लिए स्पष्ट निर्देश
श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए मंदिर परिसर में विभिन्न पूजाओं के लिए निर्धारित शुल्क की सूची चस्पा की गई है। न्यास समिति ने स्पष्ट किया है कि रसीद में ली जाने वाली राशि में ही पूजा की दक्षिणा भी शामिल होती है, जिससे भक्तों को अतिरिक्त भुगतान का झंझट नहीं रहता। प्राप्त हुई पूरी राशि को न्यास समिति के आधिकारिक बैंक खाते में जमा किया जाता है, ताकि उसका उपयोग मंदिर के विकास और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में किया जा सके। बाबा गरीबनाथ के प्रति भक्तों का यह समर्पण मुजफ्फरपुर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को और अधिक मजबूती प्रदान कर रहा है।
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