मुजफ्फरपुर: चार महीने से पेंशन के लिए तरसे बिहार विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त कर्मी, प्रशासनिक दफ्तरों में कामकाज ठप
पेंशनरों का सब्र टूटा, विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ खोला मोर्चा
मुजफ्फरपुर स्थित बिहार विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। पिछले चार महीनों से पेंशन का भुगतान नहीं होने के कारण सैकड़ों बुजुर्ग पेंशनरों ने विश्वविद्यालय परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। आर्थिक तंगी से जूझ रहे इन सेवानिवृत्त कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कार्यों को पूरी तरह से बाधित कर दिया है।
आर्थिक संकट से जूझ रहे बुजुर्ग
पेंशनरों का कहना है कि उम्र के इस पड़ाव पर वे पूरी तरह से अपनी पेंशन पर निर्भर हैं। चार महीने से भुगतान नहीं होने के कारण उनके सामने दवाइयों और घर के खर्च चलाने का संकट गहरा गया है। प्रदर्शनकारी शिक्षकों और कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी समस्याओं के प्रति उदासीन बना हुआ है। कई बार गुहार लगाने के बावजूद उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है, जिससे उनमें भारी आक्रोश है।
कामकाज पर असर
विरोध प्रदर्शन के चलते विश्वविद्यालय के प्रशासनिक दफ्तरों में कामकाज पूरी तरह से ठप पड़ गया है। कर्मचारियों के काम पर नहीं आने और पेंशनरों के घेराव के कारण प्रशासनिक फाइलें और अन्य जरूरी कार्य प्रभावित हुए हैं। विश्वविद्यालय के अधिकारी स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पेंशनरों का कहना है कि जब तक उनके खाते में बकाया राशि नहीं आती, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
- पेंशनरों की मुख्य मांग: चार महीने का बकाया पेंशन तुरंत जारी हो।
- प्रशासनिक स्थिति: दफ्तरों में कामकाज पूरी तरह से बंद।
- आगामी कदम: पेंशनरों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज होगा।
फिलहाल, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई ठोस समय सीमा नहीं दी गई है, जिससे पेंशनरों की चिंताएं और बढ़ गई हैं। स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और विश्वविद्यालय की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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