मुजफ्फरपुर: बेगूसराय भेजे गए 16 किशोरियों की सुध लेने में बरती गई लापरवाही, जिला विधिक सेवा प्राधिकार सख्त
बाल कल्याण समिति की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
मुजफ्फरपुर की बाल कल्याण समिति (CWC) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने समिति की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। मामला बेगूसराय स्थित बालिका गृह में रह रही 16 किशोरियों से जुड़ा है, जिन्हें विभिन्न अदालती आदेशों के बाद वहां भेजा गया था।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन 16 किशोरियों को मुजफ्फरपुर से बेगूसराय के बालिका गृह में स्थानांतरित किया गया था। नियमों के अनुसार, बाल कल्याण समिति के सदस्यों का यह दायित्व है कि वे समय-समय पर वहां जाकर इन किशोरियों की स्थिति, उनकी सुरक्षा और सुविधाओं का जायजा लें। हालांकि, लंबे समय तक समिति के किसी भी सदस्य ने वहां जाकर बच्चियों की सुध नहीं ली।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बेगूसराय जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने मुजफ्फरपुर को पत्र लिखकर इस स्थिति से अवगत कराया। इस सूचना के बाद प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार की अध्यक्ष श्वेता कुमारी सिंह ने कड़ी नाराजगी जताई है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव तेज कुमार प्रसाद ने इस संबंध में जिलाधिकारी को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। प्राधिकार ने स्पष्ट किया है कि किशोरियों की देखरेख में बरती गई यह उदासीनता न केवल कानूनी जिम्मेदारियों का उल्लंघन है, बल्कि यह बेहद असंवेदनशील और निंदनीय भी है। प्राधिकार ने इसे बच्चों के अधिकारों के प्रति घोर लापरवाही करार दिया है।
समिति का क्या है पक्ष?
इस पूरे प्रकरण पर बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष उदयशंकर शर्मा ने सफाई देते हुए कहा है कि किशोरियों से मिलने और उनके हाल-चाल जानने के लिए विजिट प्लान तैयार कर लिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि समिति के सदस्य जल्द ही बेगूसराय बालिका गृह का दौरा करेंगे।
बहरहाल, सवाल यह उठता है कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही क्यों हुई और क्या प्रशासनिक दबाव के बाद ही जिम्मेदार संस्थाएं अपने कर्तव्यों का पालन करेंगी? स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी चूक न हो और बालिका गृह में रह रही किशोरियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
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