मुजफ्फरपुर में मछली पालन से बदल रही किसानों की तकदीर, उत्पादन में लगातार हो रही बढ़ोतरी
मुजफ्फरपुर में मत्स्य पालन का बढ़ता दायरा
मुजफ्फरपुर के किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर मछली पालन को एक मुनाफे वाले व्यवसाय के रूप में देख रहे हैं। रोहू, कतला, नैनी और पंगाश जैसी मछलियों की बढ़ती मांग ने जिले में मत्स्य उत्पादन के नए रिकॉर्ड स्थापित किए हैं। पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में मछली उत्पादन का ग्राफ लगातार ऊपर की ओर जा रहा है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
उत्पादन के बढ़ते आंकड़े
जिला मत्स्य कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023-24 में जिले में 40.05 हजार मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ था। यह आंकड़ा 2024-25 में बढ़कर 42.53 हजार मीट्रिक टन और 2025-26 में 43.28 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गया। तीन वर्षों के भीतर कुल 3.23 हजार मीट्रिक टन की वृद्धि यह दर्शाती है कि किसान अब वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर बेहतर परिणाम प्राप्त कर रहे हैं।
स्थानीय हैचरियों की भूमिका
मछली पालन को आसान बनाने में जिले में स्थापित 17 हैचरियों (जिनमें से 16 सक्रिय हैं) का बड़ा योगदान है। पहले किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज के लिए दूसरे जिलों या राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे लागत अधिक आती थी। अब स्थानीय स्तर पर बीज की उपलब्धता ने किसानों का समय और पैसा दोनों बचाया है। इसके अलावा, ग्रास कार्प, कॉमन कार्प और रूपचंद जैसी प्रजातियों के पालन से बाजार में किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं।
प्रशिक्षण और भविष्य की राह
मत्स्य विभाग किसानों को वैज्ञानिक तरीके से तालाब प्रबंधन, प्रजातियों के चयन और आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दे रहा है। विभाग का लक्ष्य है कि सरकारी योजनाओं का लाभ हर गांव तक पहुंचे। आने वाले समय में सभी प्रखंडों में जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे, ताकि किसान न केवल उत्पादन बढ़ा सकें, बल्कि अपनी आय में भी स्थायी वृद्धि कर सकें। यह पहल न केवल युवाओं को स्वरोजगार की ओर प्रेरित कर रही है, बल्कि कृषि क्षेत्र में एक नई क्रांति का सूत्रपात भी कर रही है।
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