मुजफ्फरपुर में स्ट्रीट लाइट परियोजना पर सवाल: ब्रांडेड की जगह लोकल स्विच लगाने का खुलासा, गुणवत्ता पर उठे प्रश्न
मुजफ्फरपुर में स्ट्रीट लाइट परियोजना पर सवाल: ब्रांडेड की जगह लोकल स्विच लगाने का खुलासा, गुणवत्ता पर उठे प्रश्न
मुजफ्फरपुर शहर में नई एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने की महत्वाकांक्षी परियोजना में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी का गंभीर मामला सामने आया है। नगर निगम के कार्यपालक अभियंता विजेंद्र कुमार की जांच में यह खुलासा हुआ है कि स्ट्रीट लाइट के खंभों पर लगाए जा रहे एमसीबी स्विच और बॉक्स में निविदा शर्तों के विपरीत ब्रांडेड उपकरणों की जगह स्थानीय और गैर-ब्रांडेड सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस अनियमितता ने पूरे प्रोजेक्ट की विश्वसनीयता और संभावित वित्तीय गड़बड़ी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शहर के 49 वार्डों में गलियों और मुख्य सड़कों को रोशन करने के लिए छह हजार से अधिक नई एलईडी स्ट्रीट लाइटें लगाई जानी हैं। ऐसे में परियोजना के शुरुआती चरण में ही इस तरह की अनियमितता सामने आना चिंताजनक है। निविदा समझौते के अनुसार, निर्धारित गुणवत्ता वाले उपकरण ही लगाए जाने थे, लेकिन मौके पर हुई जांच में इसका उल्लंघन पाया गया।
जांच में सामने आई अनियमितता
कार्यपालक अभियंता विजेंद्र कुमार को स्ट्रीट लाइट लगाने के दौरान मानकों की अनदेखी की शिकायतें मिली थीं। इन शिकायतों के आधार पर उन्होंने स्वयं मौके पर जाकर पोल पर लगाए जा रहे एमसीबी स्विच और बॉक्स की गुणवत्ता की जांच की। जांच के दौरान, यह स्पष्ट हो गया कि लगाए गए उपकरण गैर-ब्रांडेड थे, जो निविदा की शर्तों का सीधा उल्लंघन है।
जांच के बाद, कार्यपालक अभियंता ने संबंधित एजेंसी के प्रतिनिधियों से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा और उन्हें निर्धारित मानकों के अनुरूप ही उपकरण लगाने का सख्त निर्देश दिया। एजेंसी ने अपने बचाव में कहा कि काम को तेजी से पूरा करने के लिए फिलहाल स्थानीय और गैर-ब्रांडेड स्विच लगाए जा रहे हैं, और उन्हें छह महीने के भीतर हटाकर ब्रांडेड स्विच लगा दिए जाएंगे। हालांकि, नगर निगम इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं है, क्योंकि निविदा शर्तों में इस तरह के किसी भी प्रावधान का उल्लेख नहीं है।
गुणवत्ता और सुरक्षा पर चिंता
ब्रांडेड की जगह गैर-ब्रांडेड स्विच और बॉक्स के इस्तेमाल से उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। विशेषकर बारिश और नमी के मौसम में, निम्न गुणवत्ता वाले विद्युत उपकरणों में खराबी या शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ सकता है, जिससे न केवल स्ट्रीट लाइटों की कार्यप्रणाली प्रभावित होगी, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा को भी खतरा हो सकता है। ऐसे में, परियोजना में इस्तेमाल होने वाले सभी उपकरणों की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों के अनुरूप होने की गहन जांच आवश्यक मानी जा रही है।
पहले भी उठे हैं सवाल
यह पहली बार नहीं है जब मुजफ्फरपुर नगर निगम में स्ट्रीट लाइट से संबंधित परियोजनाओं पर सवाल उठे हैं। पूर्व में भी स्ट्रीट लाइट की खरीद, स्थापना और रखरखाव को लेकर सशक्त स्थायी समिति और बोर्ड की बैठकों में पार्षदों द्वारा अनियमितताओं के आरोप लगाए जाते रहे हैं। नई एलईडी स्ट्रीट लाइट परियोजना में सामने आए इस ताजा मामले ने निगम की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जनप्रतिनिधियों ने पूरे कार्य की तकनीकी जांच कराने और मानकों के विपरीत उपकरण पाए जाने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। नगर निगम अब इस मामले में आगे की कार्रवाई पर विचार कर रहा है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
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