सेनेगल में फंसे मुजफ्फरपुर के उमाशंकर की वतन वापसी: ‘भारत लौटने की उम्मीद छोड़ चुका था’
मुजफ्फरपुर के उमाशंकर सेनेगल से लौटे, परिवार में खुशी का माहौल
पश्चिम अफ्रीकी देश सेनेगल के डकार में लगभग चार महीने तक फंसे रहने के बाद मुजफ्फरपुर के कुढ़नी पंचायत निवासी उमाशंकर कुमार आखिरकार अपने घर लौट आए हैं। सोमवार को कोठियां गांव स्थित अपने घर पहुंचते ही उनकी आंखें नम हो गईं। पत्नी चांदनी देवी और बच्चों ने उन्हें देखते ही गले लगा लिया, जिससे परिवार के मिलन का यह क्षण बेहद भावुक हो उठा।
उमाशंकर ने अपनी वापसी के लिए कई लोगों और संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, ‘मैं तो भारत लौटने की उम्मीद ही छोड़ चुका था। केंद्रीय मंत्री सह सांसद डॉ. राजभूषण चौधरी और पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता की पहल से ही आज मैं अपनी मिट्टी पर वापस आ सका हूं।’
दूतावास की मदद से हुई वापसी
उमाशंकर की भारत वापसी के लिए भारतीय दूतावास ने हवाई टिकट की व्यवस्था की। रविवार को वे दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे और फिर दिल्ली जंक्शन से शाम 6 बजे मुजफ्फरपुर आने वाली स्पेशल ट्रेन पकड़ी। सोमवार देर शाम वे कुढ़नी के कोठियां स्थित अपने घर पहुंचे। उनके पहुंचते ही परिवार में खुशी और भावुकता का माहौल छा गया। पत्नी और बच्चे उनसे लिपटकर रोने लगे। इसके बाद आसपास के लोग भी उनका हालचाल जानने और उनसे मिलने उनके घर पहुंचने लगे।
डकार में झेलनी पड़ीं कई परेशानियां
उमाशंकर ने डकार में अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वहां रहने के दौरान उनके पैसे खत्म हो गए थे। कंपनी मालिक और स्थानीय लोगों ने उन्हें काफी परेशान किया। उन्हें कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, यहां तक कि खाने की भी उचित व्यवस्था नहीं थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने उनका पासपोर्ट और वीजा अपने पास रख लिया था। उनसे रोजाना करीब 12 घंटे काम कराया जाता था और तबीयत खराब होने पर भी काम करने का दबाव बनाया जाता था।
वेतन में धोखाधड़ी और काम की शर्तें
उमाशंकर के अनुसार, वे 17 मई 2026 को सेनेगल के डकार स्थित एक कंपनी में काम करने गए थे। भारत में उन्हें 60 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन देने का वादा किया गया था, लेकिन डकार पहुंचने के बाद कंपनी मालिक ने उनसे 30 हजार रुपये प्रतिमाह का एग्रीमेंट कराया। उन्होंने बताया कि वे 19 मई से कंपनी की हेचरी में काम कर रहे थे। विदेश में नौकरी के लिए जाने के बाद सामने आई इन प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण वे बहुत परेशान हो गए थे।
दूतावास के हस्तक्षेप से मिला पासपोर्ट
उमाशंकर की वापसी के लिए विदेश मंत्रालय की पहल के बाद, बीते बुधवार को कंपनी मालिक को भारतीय दूतावास में बुलाया गया था। उमाशंकर को भी दूतावास बुलाकर करीब चार घंटे तक पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली गई। उनके मुताबिक, दूतावास के निर्देश पर कंपनी मालिक ने उनका पासपोर्ट वापस कर दिया, जिसके बाद भारत लौटने का रास्ता साफ हुआ और उनके टिकट की व्यवस्था की गई।
घर लौटने के बाद उमाशंकर ने कहा कि अब वे अपने देश में रहकर ही नौकरी करेंगे। उन्होंने बताया कि विदेश भेजने के नाम पर जिस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा, उससे वे पूरी तरह टूट चुके थे। उमाशंकर ने कहा कि सेनेगल में बिताया यह अनुभव वे कभी नहीं भूल पाएंगे। अब वे अपने परिवार के साथ समय बिता रहे हैं। उनके घर पहुंचने की खबर मिलने के बाद रिश्तेदार और आसपास के लोग लगातार उनका हालचाल जानने पहुंच रहे हैं।
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