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त्योहारी सीजन में ट्रेनों की लेटलतीफी से यात्री बेहाल, मुजफ्फरपुर-समस्तीपुर में औसत 51 मिनट की देरी

दीपावली और छठ जैसे महापर्वों के दौरान घर लौटने वाले यात्रियों को रेलवे की स्पेशल ट्रेनों से भी राहत नहीं मिल पाई। मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर जंक्शन से गुजरने वाली ट्रेनों की लेटलतीफी ने उनकी यात्रा को और भी मुश्किल बना दिया। एक विश्लेषण के अनुसार, इन दोनों जंक्शनों से गुजरने वाली कुल 295 ट्रेनों में औसतन 51 मिनट की देरी दर्ज की गई, जिससे हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

मुजफ्फरपुर में स्थिति अधिक गंभीर

आंकड़ों के मुताबिक, मुजफ्फरपुर जंक्शन पर 134 ट्रेनों की औसत देरी 54 मिनट रही, जबकि समस्तीपुर में 161 ट्रेनों की औसत देरी 49 मिनट दर्ज की गई। सबसे चिंताजनक स्थिति जयनगर-अमृतसर फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन की रही, जो मुजफ्फरपुर में औसतन 15 घंटे 46 मिनट की भारी देरी से पहुंची। जननायक एक्सप्रेस भी सात से आठ घंटे तक विलंब से चल रही थी, जिससे यात्रियों का लंबा इंतजार और बढ़ गया।

त्योहार के शुरुआती दिनों में बढ़ी मुश्किलें

26 से 31 अक्टूबर के बीच मुजफ्फरपुर जंक्शन पर 134 ट्रेनों के परिचालन का विश्लेषण किया गया। त्योहार के शुरुआती दिनों में ट्रेनों की लेटलतीफी अधिक रही। 26 अक्टूबर को ट्रेनों की औसत देरी एक घंटा तीन मिनट, 27 अक्टूबर को एक घंटा पांच मिनट और 28 अक्टूबर को एक घंटा 18 मिनट रही। इन दिनों में यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ी।

  • जयनगर-अमृतसर स्पेशल (04651): औसतन 15 घंटे 46 मिनट विलंब
  • अमृतसर-जयनगर स्पेशल (04652): औसतन 11 घंटे आठ मिनट विलंब
  • छेहरटा-मुजफ्फरपुर मेमू: 10 घंटे चार मिनट विलंब
  • अलीपुरद्वार-आनंद विहार साप्ताहिक स्पेशल: सात घंटे 39 मिनट विलंब
  • नई दिल्ली-दरभंगा स्पेशल: सात घंटे 10 मिनट विलंब

इसके अलावा, सरयू यमुना, अंत्योदय और आनंद विहार दिल्ली-हसनपुर रोड स्पेशल जैसी अन्य ट्रेनें भी विलंब से चलीं।

समस्तीपुर में भी धीमी पड़ी रफ्तार

समस्तीपुर जंक्शन पर भी 26 से 31 अक्टूबर के बीच 161 ट्रेनों की स्थिति का विश्लेषण किया गया, जहां औसत देरी 49 मिनट रही। यहां अमृतसर-जयनगर स्पेशल 14 घंटे 21 मिनट और जयनगर-अमृतसर स्पेशल 10 घंटे 48 मिनट की देरी से पहुंची। जननायक एक्सप्रेस की औसत देरी आठ घंटे दो मिनट रही। 31 अक्टूबर को मुजफ्फरपुर पहुंचने वाली 11 ट्रेनें भी विलंब से आईं, जिनमें एलटीटी-रक्सौल स्पेशल 28 घंटे 10 मिनट तक देर से पहुंची। यात्रियों ने रेलवे के सोशल मीडिया हैंडल पर भी अपनी शिकायतें दर्ज कराईं।

लंबी दूरी की ट्रेनों के विलंब से यात्रियों की आगे की यात्रा भी प्रभावित हुई। स्टेशन पर घंटों इंतजार के दौरान उन्हें खाने-पीने और ठहरने पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को विशेष रूप से कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। ट्रेनों के आगमन का सही समय न मिलने से यात्री लगातार पूछताछ काउंटर और डिस्प्ले बोर्ड पर जानकारी लेते रहे, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई।


अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध स्थानीय स्रोतों के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है। AI से त्रुटियाँ संभव हैं और इस सामग्री की सटीकता या प्रामाणिकता की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। TheAinak केवल सूचनाओं का संकलन करता है और इसकी विषय-वस्तु के लिए उत्तरदायी नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने या उसके आधार पर कोई कार्रवाई करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य कर लें।

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