प्रसाद हॉस्पिटल विवाद: निगम की मापी पर अस्पताल प्रबंधन ने खड़े किए सवाल, 21 अगस्त को अगली सुनवाई
मुजफ्फरपुर में प्रसाद हॉस्पिटल मामले में कानूनी खींचतान जारी
मुजफ्फरपुर के चर्चित प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड के बाद अब अस्पताल प्रबंधन और नगर निगम के बीच भवन निर्माण के नक्शे को लेकर विवाद गहरा गया है। शुक्रवार को नगर आयुक्त की अदालत में अस्पताल प्रबंधन ने निगम द्वारा की गई भवन की मापी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अस्पताल के कानूनी प्रतिनिधियों ने तर्क दिया कि निगम की टीम द्वारा की गई पैमाइश त्रुटिपूर्ण है और उन्होंने पूरे भवन की फिर से निष्पक्ष मापी कराने की मांग की है। इस मामले में अब अगली सुनवाई 21 अगस्त को निर्धारित की गई है।
क्या है पूरा मामला?
बीते चार जून को प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू में लगी भीषण आग ने नौ मरीजों की जान ले ली थी। इस दुखद घटना के बाद प्रशासन ने अस्पताल की गहन जांच शुरू की, जिसमें भवन निर्माण में भारी अनियमितताएं सामने आईं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल का निर्माण नगर निगम से स्वीकृत नक्शे के विपरीत किया गया था। वर्ष 2011 में स्वीकृत नक्शे में बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर के साथ चार मंजिला भवन की अनुमति दी गई थी, लेकिन मौके पर स्थिति बिल्कुल अलग पाई गई।
- स्वीकृत नक्शे के अनुसार पहली मंजिल पर ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू होने चाहिए थे, जबकि वहां जेनरल वार्ड संचालित हो रहा था।
- चौथी मंजिल पर डॉक्टरों के लिए आवासीय व्यवस्था होनी थी, लेकिन वहां ऑपरेशन थिएटर बना दिया गया।
- अवैध रूप से पांचवीं मंजिल का निर्माण कर वहां आईसीयू संचालित किया जा रहा था।
- पार्किंग क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर पैथोलॉजी लैब और दवा की दुकान खोल दी गई थी।
जुर्माने और कार्रवाई की तलवार
बिल्डिंग बायलॉज के उल्लंघन के कारण अस्पताल प्रबंधन पर भारी जुर्माना लगने की संभावना है। नियमों के मुताबिक, अस्पताल पर 1 से 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, एमवीआर (न्यूनतम मूल्य रजिस्टर) दर के आधार पर 10 से 15 प्रतिशत तक का अतिरिक्त जुर्माना भी वसूला जा सकता है। यदि अवैध निर्माण की पुष्टि होती है, तो प्रशासन अस्पताल के उन हिस्सों को ध्वस्त करने का आदेश भी दे सकता है जो स्वीकृत नक्शे का उल्लंघन करते हैं।
स्वास्थ्य विभाग की जांच
एक तरफ जहां निगम के साथ कानूनी लड़ाई चल रही है, वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग की टीम भी लगातार अस्पताल की निगरानी कर रही है। शुक्रवार को विभाग की टीम ने अस्पताल के ओपीडी, डायलिसिस और इमरजेंसी सेवाओं का निरीक्षण किया। इससे पहले बुधवार को भी टीम ने अस्पताल का जायजा लिया था। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की जांच में इन सेवाओं के संचालन में कोई कमी नहीं पाई गई है।
शहर के इस प्रमुख अस्पताल पर मंडराते कानूनी संकट और प्रशासनिक कार्रवाई पर पूरे शहर की नजरें टिकी हैं।
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