बीआरएबीयू में छात्रों की भूख हड़ताल जारी: बिगड़ती तबीयत के बावजूद डटे, प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप
मुजफ्फरपुर: बीआरए बिहार विश्वविद्यालय (बीआरएबीयू) परिसर में छात्रों की भूख हड़ताल रविवार को लगातार पांचवें दिन भी जारी रही। छात्रावास सहित विभिन्न मांगों को लेकर धरने पर बैठे छात्रों ने विश्वविद्यालय और कॉलेज प्रशासन पर वादाखिलाफी और उनकी समस्याओं के प्रति उदासीनता का गंभीर आरोप लगाया है। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, वे अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे।
शनिवार को अनशन के चौथे दिन कुछ छात्रों की तबीयत बिगड़ गई थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया। विश्वविद्यालय अधिकारियों के साथ हुई बातचीत भी बेनतीजा रही। छात्रों ने आरोप लगाया कि पहले छात्रावास के लिए 70 छात्रों ने आवेदन किया था, जबकि कॉलेज प्रशासन केवल 2 आवेदन मिलने की बात कह रहा है, जो सरासर गलत है।
छात्रों की प्रमुख मांगें और आरोप
- छात्रावास का मुद्दा: अनशनकारी छात्र सुशांत ने कहा कि लंगट बाबू ने छात्रों के लिए छात्रावास बनवाया था, लेकिन अब इसे बंद रखा जा रहा है ताकि छात्रों को कैंपस से दूर रखा जा सके। छात्रों की मांग है कि छात्रावास को तत्काल छात्रों के लिए खोला जाए।
- शिक्षा में सुविधाएं: छात्र दीपेश ने बताया कि एससी-एसटी के छात्रों और सभी वर्ग की छात्राओं के लिए सरकार ने निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था की है, ऐसे में विश्वविद्यालय स्तर पर छात्रों को आवश्यक सुविधाएं मिलनी चाहिए।
- प्रशासन पर उदासीनता: छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय और कॉलेज प्रशासन उनकी समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं है और केवल टालमटोल कर रहा है।
प्रशासन और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया
विश्वविद्यालय की ओर से कुलानुशासक प्रो. विपिन कुमार राय और कॉलेज निरीक्षक डॉ. राजीव कुमार ने छात्रों से बातचीत कर आंदोलन समाप्त करने की अपील की थी। हालांकि, छात्र अपनी मांगों पर ठोस आश्वासन मिलने तक अनशन खत्म करने को तैयार नहीं हुए।
इस आंदोलन को विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का समर्थन भी मिल रहा है। शनिवार को सामाजिक कार्यकर्ता रघुनन्दन प्रसाद सिंह, जदयू नेता सह प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक झा, एमएलसी वंशीधर ब्रजवासी और डॉ. सादात खयाम धरना स्थल पर पहुंचे थे। जिला कांग्रेस कमेटी पश्चिमी के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी छात्रों से मुलाकात कर उन्हें समर्थन दिया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष कृपा शंकर शाही ने सरकार से तत्काल एक समिति गठित कर छात्रों की मांगों की बिंदुवार जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
एलएस कॉलेज का स्पष्टीकरण
एलएस कॉलेज की प्राचार्य प्रो. कनुप्रिया ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के सत्र 2024-28, 2025-29 और 2026-30 में नामांकित छात्रों को हॉस्टल में नामांकन के लिए 30 अक्टूबर तक का मौका दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्व में कम आवेदन प्राप्त होने के कारण ही आवेदन की तिथि बढ़ाई गई है। छात्रों का यह आंदोलन अब प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
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