मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर उठे सवाल: मुजफ्फरपुर में लगातार दूसरे दिन विरोध-प्रदर्शन, CPM ने फूंका पुतला
मुजफ्फरपुर में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन का सिलसिला जारी है। शुक्रवार को राजद के प्रदर्शन के बाद शनिवार को भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPM ने प्रतिरोध मार्च निकाला और CEC ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया। पार्टी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
CPM जिला कमेटी सदस्य सूरज कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं। उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सिंह ने हाल ही में सामने आई उन खबरों का भी जिक्र किया, जिनमें चुनाव आयोग के भीतर फैसलों को लेकर निर्वाचन आयुक्तों द्वारा आपत्ति दर्ज करने की बात कही गई थी। विपक्षी दल इन रिपोर्टों के आधार पर CEC ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठा रहे हैं।
‘वोट चोरी’ के आरोप और मतदाता सूची पर सवाल
सूरज कुमार सिंह ने बिहार और पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान ‘वोट चोरी’ के जरिए सरकार बनाने की कोशिशों का आरोप लगाया। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं किया जा सकता। उन्होंने SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं से मांगे जा रहे दस्तावेजों पर भी आपत्ति जताई। सिंह के अनुसार, मतदाताओं से उनके माता-पिता और दादा-दादी के नाम तथा उनसे जुड़े दस्तावेजों की जानकारी मांगी जा रही है।
हालांकि, निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर SIR-2026 के तहत पुराने मतदाता रिकॉर्ड में नाम खोजने की सुविधा उपलब्ध है। आयोग के अनुसार, मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन की जिम्मेदारी निर्धारित चुनावी अधिकारियों की होती है।
CPM का अल्टीमेटम और देशव्यापी विरोध
CPM ने सरकार को 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। पार्टी का कहना है कि यदि इस अवधि में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। सूरज कुमार सिंह ने इस मुद्दे को संविधान और मतदाताओं के अधिकार से जोड़ते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से पूरे मामले पर जवाब मांगा है।
मुजफ्फरपुर में यह लगातार दूसरा दिन है जब किसी विपक्षी दल ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया है। इससे एक दिन पहले राजद ने भी पुतला दहन किया था। देश के अन्य हिस्सों में भी विपक्षी दल SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
इस बीच, चुनाव आयोग से जुड़े विवाद में आयोग का पक्ष भी सामने आया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने कहा है कि उसके अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। यह घटनाक्रम देश में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर चल रही बहस को और गहरा करता है।
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