मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड: मानवाधिकार आयोग पहुंचा मामला, रिटायर्ड जज की निगरानी में जांच की मांग
मुजफ्फरपुर में अस्पताल के आईसीयू में लगी भीषण आग, 5 मरीजों की दर्दनाक मौत
मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में गुरुवार की सुबह हुई एक भीषण अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। अस्पताल की चौथी मंजिल पर स्थित आईसीयू में तड़के करीब तीन बजे अचानक आग लग गई, जिससे वहां भर्ती मरीजों के बीच अफरातफरी मच गई। इस हादसे में पांच मरीजों की जलकर मौत हो गई, जबकि 15 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घायलों को इलाज के लिए विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
मानवाधिकार आयोग में याचिका, निष्पक्ष जांच की मांग
इस हृदयविदारक घटना को लेकर अब कानूनी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। मानवाधिकार मामलों के अधिवक्ता सुबोध कुमार झा ने इस मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली और राज्य मानवाधिकार आयोग, पटना के समक्ष उठाया है। याचिका में मांग की गई है कि पूरे मामले की जांच किसी रिटायर्ड जज की निगरानी में कराई जाए ताकि दोषियों को बख्शा न जाए। अधिवक्ता का कहना है कि अस्पताल जीवन बचाने का स्थान है, वहां सुरक्षा मानकों में चूक और ऐसी लापरवाही अक्षम्य है। उन्होंने राज्य के सभी निजी अस्पतालों में फायर ऑडिट अनिवार्य करने की भी मांग की है।
प्रशासनिक कार्रवाई और जांच के लिए टीम का गठन
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है। जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन के निर्देश पर पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है, जो घटना के कारणों की पड़ताल करेगी। नगर आयुक्त ऋतुराज प्रताप सिंह ने बताया कि जांच टीम को हर पहलू को बारीकी से देखने को कहा गया है। वहीं, एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने बताया कि फॉरेंसिक साइंस लैब की टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया है और उस हिस्से को सील कर दिया गया है। पुलिस अस्पताल प्रबंधन से पूछताछ कर रही है और लापरवाही के हर बिंदु पर कार्रवाई की तैयारी है।
मुआवजे का ऐलान और सुरक्षा पर सवाल
राज्य सरकार ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की गई है। साथ ही, जिला प्रशासन को घायलों के समुचित इलाज की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। इस घटना ने मुजफ्फरपुर के निजी अस्पतालों में सुरक्षा मानकों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अग्निशमन विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक पांच जिंदगियां काल के गाल में समा चुकी थीं। अब प्रशासन ने जिले के अन्य अस्पतालों में भी फायर ऑडिट के निर्देश दिए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
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