मुजफ्फरपुर: कचरे की दुर्गंध से भड़के ग्रामीण, नगर निगम के अधिकारी डेढ़ घंटे बंधक बनाए गए; विधायक के हस्तक्षेप से छूटे
मुजफ्फरपुर के रौतिनिया स्थित कचरा डंपिंग प्वाइंट पर कचरे के अनुचित निष्पादन और मरे हुए मवेशियों के कारण फैल रही भीषण दुर्गंध से आक्रोशित ग्रामीणों ने बुधवार को नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों को लगभग डेढ़ घंटे तक बंधक बनाए रखा। ग्रामीणों ने नगर निगम कार्यालय के बाहर जमकर नारेबाजी की और तत्काल समाधान की मांग की। स्थानीय विधायक ई. अजीत कुमार के हस्तक्षेप और जिलाधिकारी से फोन पर बातचीत के बाद अधिकारियों को मुक्त कराया गया, जिसमें एक सप्ताह के भीतर समस्या के स्थायी समाधान का आश्वासन दिया गया है।
यह घटना बुधवार दोपहर करीब ढाई बजे हुई, जब नगर निगम के उप आयुक्त अमित कुमार, स्वच्छता पदाधिकारी गौरव नारायण और सहायक अभियंता मुजम्मिल सहित लगभग आधा दर्जन अधिकारी और कर्मचारी डंपिंग प्वाइंट पर पहुंचे थे। उनकी मौजूदगी की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। ग्रामीणों ने अधिकारियों से डंपिंग प्वाइंट पर कचरे के उचित निष्पादन और दुर्गंध की समस्या के स्थायी समाधान की मांग की। उनका आरोप था कि शहर के मरे हुए मवेशियों और अन्य कचरे को यहां लाकर फेंक दिया जाता है, लेकिन उसका सही तरीके से निपटान नहीं होता, जिससे आसपास के गांवों के लोगों के साथ-साथ रेवा रोड से गुजरने वाले राहगीरों को भी भारी परेशानी हो रही है।
आक्रोशित ग्रामीणों ने नगर आयुक्त और जिलाधिकारी को मौके पर बुलाने की मांग की। हंगामे की सूचना पर स्थानीय विधायक ई. अजीत कुमार और मड़वन सीओ पुष्कल कुमार तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। विधायक ने पहले ग्रामीणों से बातचीत की, उनकी शिकायतें सुनीं और फिर जिलाधिकारी से फोन पर बात कर डंपिंग प्वाइंट की गंभीर समस्या से अवगत कराया। जिलाधिकारी ने एक सप्ताह के भीतर कचरे के निष्पादन सहित अन्य समस्याओं का समाधान कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि निर्धारित अवधि में समस्या दूर नहीं हुई, तो संबंधित एजेंसी का अनुबंध रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद ही ग्रामीणों ने बंधक बनाए गए अधिकारियों और कर्मचारियों को छोड़ा।
विधायक ई. अजीत कुमार ने इस मामले में नगर निगम प्रशासन, विशेषकर नगर आयुक्त पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल से डंपिंग प्वाइंट की समस्या के समाधान के लिए सरकार, नगर निगम और जिला प्रशासन के स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई अपेक्षित परिणाम नहीं मिला है। विधायक ने एमआरएफ एजेंसी के कामकाज पर भी सवाल उठाया और उसकी जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांटी और मड़वन को कचरे का ढेर नहीं बनने दिया जाएगा।
स्थानीय ग्रामीणों जैसे मो. शमीम, सुधीर कुमार सिंह, मनोज सिंह, अंकेश कुमार ओझा, सुधीर चौधरी, मो. रफीक और मो. फूल बाबू ने बताया कि कचरा फेंकने के बाद उसका निष्पादन नहीं होता, जिससे दुर्गंध फैल रही है और आसपास रहना दूभर हो गया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 17 नवंबर तक समस्या के समाधान के लिए ठोस पहल नहीं हुई, तो 18 नवंबर से वे रेवा रोड एनएच-722 को अनिश्चितकाल के लिए जाम कर देंगे। इस घटना ने मुजफ्फरपुर में कचरा प्रबंधन की गंभीर चुनौती को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
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