मुजफ्फरपुर के किसान परेशान: फार्मर आईडी के बिना खाद-बीज की किल्लत, रबी की बुआई पर संकट
मुजफ्फरपुर में किसानों की बढ़ती चिंता: फार्मर आईडी के अभाव में खाद-बीज से वंचित
मुजफ्फरपुर जिले में हजारों किसान इन दिनों गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। ‘फार्मर आईडी’ के बिना उन्हें न तो खाद मिल पा रही है, न ही बीज, जिससे रबी फसलों की बुआई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कृषि विभाग की अन्य योजनाओं का लाभ भी उन्हें नहीं मिल पा रहा है। किसानों ने अपनी इस समस्या को मुख्यमंत्री कार्यालय, प्रदेश के कृषि मंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री तक पहुंचाया है, लेकिन समाधान अभी दूर है।
किसानों का आरोप है कि कृषि विभाग ने रबी सीजन के लिए पोर्टल से अन्य आईडी के विकल्प हटा दिए हैं। अब केवल वही किसान खाद के लिए आवेदन कर सकते हैं जिनके पास फार्मर आईडी है। जिले के लगभग पांच लाख किसानों में से केवल दो लाख के पास ही यह आईडी उपलब्ध है। इससे तीन लाख से अधिक किसान खाद और बीज की बुकिंग प्रक्रिया में पहले चरण से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। कई किसानों का कहना है कि दस्तावेज जमा करने के बावजूद विभागीय कर्मियों की लापरवाही के कारण उनकी फार्मर आईडी नहीं बन पाई है। कुछ किसानों की शिकायत है कि उनकी भूमि पुरखों के नाम पर होने के कारण विभाग आईडी बनाने से इनकार कर रहा है। ऐसे में उन्हें खुले बाजार से अधिक कीमत पर खाद और बीज खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है, साथ ही अनुदान पर मिलने वाले कृषि यंत्रों की खरीद में भी समस्या आ रही है।
बोचहां के किसान महेश्वर राय, मंजीत प्रसाद और उमेश्वर शर्मा ने बताया कि उन्होंने पिछले साल ही अपनी भूमि अपने नाम करा ली थी और दाखिल-खारिज के बाद सभी दस्तावेज इस साल मई में प्रखंड कृषि कार्यालय में जमा कर दिए थे। इसके बावजूद उन्हें आज तक फार्मर आईडी नहीं मिल पाई है। न तो उनके आवेदन रद्द होने की सूचना दी जा रही है और न ही उसमें कोई कमी बताई जा रही है, जिससे वे संशोधन कर दोबारा आवेदन कर सकें।
मीनापुर के किसान अमरेंद्र कुमार और संतोष तिवारी सहित दर्जनों किसानों का आरोप है कि खाद खरीदारी के लिए जारी ‘फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल (एफएफएस)’ ऐप में नए जमाबंदी, खाता और खेसरा अपडेट नहीं हो पा रहे हैं। इससे भी खाद की बुकिंग में परेशानी आ रही है। इसके अलावा, आवेदन सबमिट होने के बाद ओटीपी नहीं आ रहा है, जो किसानों के लिए एक और बड़ी मुसीबत बन गया है। रबी सीजन की फसलों, खासकर गेहूं की बुआई का समय चरम पर है और कुछ ही दिन शेष हैं। ऐसे में खाद की अनुपलब्धता बुआई को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि खरीफ सीजन में दिए गए वैकल्पिक प्रबंध को अब समाप्त कर दिया गया है। किसानों की परेशानी को देखते हुए मुख्यालय को जानकारी भेज दी गई है। उम्मीद है कि मुख्यालय से दिशा-निर्देश मिलते ही यह समस्या एक सप्ताह के भीतर हल हो जाएगी।
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