मुजफ्फरपुर: गुरहन घास से बनेगी ‘संजीवनी’, बंजर ज़मीन फिर होगी उपजाऊ
मुजफ्फरपुर के औराई-कटरा क्षेत्र में फैली गुरहन घास अब किसानों के लिए अभिशाप नहीं, बल्कि वरदान साबित हो सकती है। करीब पांच हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को बंजर कर चुकी इस जंगली घास से अब बायोचार बनाने की योजना है, जिससे मिट्टी की खोई हुई उर्वरक शक्ति वापस लाई जा सकेगी। कृषि विभाग ने इस दिशा में पहल शुरू कर दी है, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
गुरहन घास का बढ़ता प्रकोप
बागमती नदी के तटबंधीय क्षेत्रों में उगने वाली गुरहन घास ने औराई-कटरा इलाके में लगभग 19 किलोमीटर के दायरे में अपनी जड़ें जमा ली हैं। कभी हरे-भरे खेतों में अब इस घास का घना फैलाव है, जिसने लगभग पांच हजार हेक्टेयर खेती योग्य भूमि को प्रभावित किया है। यह समस्या वर्ष 2007 की बाढ़ के बाद बांध निर्माण के दौरान बाहर से लाई गई मिट्टी के साथ गुरहन घास के बीजों के आने से शुरू हुई थी। शुरुआत में यह घास एक छोटे से क्षेत्र तक सीमित थी, लेकिन गर्मी के मौसम में हवा के साथ इसके बीज फैलते गए और धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ता चला गया। गुरहन के फैलाव से न केवल खेती प्रभावित हुई है, बल्कि अब जंगली जानवरों का बसेरा बनने से फसलों को भी नुकसान हो रहा है।
बायोचार तकनीक से समाधान
जिला कृषि विभाग अब गुरहन के फैलाव को नियंत्रित करने और प्रभावित भूमि को दोबारा उपजाऊ बनाने के लिए ‘आत्मा’ (कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण) के माध्यम से काम कर रहा है। योजना के तहत गुरहन घास को विशेष मशीन की मदद से जलाकर बायोचार तैयार किया जाएगा। बायोचार एक कार्बनयुक्त पदार्थ है, जिसे घास, फसल अवशेष या अन्य जैविक सामग्री को कम ऑक्सीजन की स्थिति में गर्म करके (पायरोलिसिस प्रक्रिया) बनाया जाता है।
मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार
आत्मा के सहायक परियोजना निदेशक बिनोद सिंह ने बताया कि बायोचार का उपयोग मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए किया जाता है। यह मिट्टी में नमी बनाए रखने में मदद करता है और उसकी उर्वरक शक्ति को बढ़ाता है। जिला कृषि पदाधिकारी भारत भूषण ने इस बात पर जोर दिया कि गुरहन जिले में एक गंभीर समस्या बन चुकी है, जिससे बड़ी मात्रा में खेती योग्य भूमि प्रभावित हुई है। कृषि विज्ञानियों के सहयोग से प्रभावित भूमि को दोबारा खेती योग्य बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इस तकनीक और प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी के लिए महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगिकी संस्थान, वर्धा (गुजरात) से भी संपर्क किया जा रहा है।
दोहरी रणनीति: नियंत्रण और उत्पादकता
इस योजना का दोहरा लाभ होगा। एक ओर गुरहन के फैलाव पर प्रभावी ढंग से रोक लगेगी, वहीं दूसरी ओर इससे तैयार बायोचार का उपयोग करके प्रभावित खेतों की उत्पादकता बढ़ाई जा सकेगी। यह पहल मुजफ्फरपुर के किसानों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है, जिससे उनकी बंजर होती जमीन को फिर से जीवन मिल सकेगा और वे अपनी आजीविका को बेहतर बना पाएंगे।
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