मुजफ्फरपुर जंक्शन का भार कम करने की तैयारी: तीन रेल बाईपास के लिए जल्द शुरू होगा सर्वे
मुजफ्फरपुर में रेल कनेक्टिविटी का नया अध्याय
मुजफ्फरपुर जंक्शन पर ट्रेनों के बढ़ते दबाव को कम करने और परिचालन को सुगम बनाने के लिए रेलवे ने अपनी महत्वाकांक्षी योजना को गति दे दी है। शहर के रेल नेटवर्क को विस्तार देने के लिए तीन नए रेल बाईपास बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिसके लिए अंतिम लोकेशन सर्वे जल्द ही धरातल पर उतरेगा। इस कार्य के लिए दिल्ली की एक विशेषज्ञ निजी एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी।
मालगाड़ियों के लिए विशेष गलियारा
रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक, इन तीनों बाईपास का प्राथमिक उद्देश्य मालगाड़ियों के आवागमन को सुव्यवस्थित करना है। वर्तमान में मुजफ्फरपुर जंक्शन से रोजाना करीब 100 नियमित ट्रेनों के अलावा कई स्पेशल ट्रेनें गुजरती हैं। छपरा से बरौनी तक एकल अप और डाउन लाइन होने के कारण मालगाड़ियों के परिचालन में अक्सर देरी होती है, जिसका सीधा असर यात्री ट्रेनों की समय-सारणी पर पड़ता है। इन बाईपास के बनने से मालगाड़ियों को मुख्य लाइन से हटाकर अलग रूट दिया जा सकेगा, जिससे ट्रेनों की लेटलतीफी पर लगाम लगेगी। भविष्य में आवश्यकतानुसार इन बाईपास का उपयोग यात्री ट्रेनों के लिए भी किया जा सकेगा।
बदला गया एलाइनमेंट, अब ग्रीन लैंड से गुजरेंगे रूट
योजना में सबसे बड़ा बदलाव सिलौत-कपरपुरा बाईपास के रूट में किया गया है। पूर्व में इसे एलिवेटेड बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन सर्वे में यह पाया गया कि इससे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बड़ी संख्या में घर प्रभावित होते और रेलवे को भारी मुआवजा देना पड़ता। अब इसे बदलकर ग्रीन लैंड से होकर गुजारा जाएगा। यह नया मार्ग कपरपुरा से सदातपुर, विजय छपरा, मेडिकल कॉलेज के समीप, चंदन बखरी और मुशहरी के रोहुआ होते हुए सिलौत तक जाएगा। इसकी कुल लंबाई 20 किलोमीटर होगी।
नई सुविधाओं का होगा विस्तार
परियोजना के अन्य हिस्सों में 25 किलोमीटर लंबा कपरपुरा-तुर्की बाईपास और 15 किलोमीटर लंबा तुर्की-सिलौत बाईपास शामिल है। तुर्की में एक नया टर्मिनल बनाने की भी योजना है। इसके अलावा, तुर्की-सिलौत बाईपास के मार्ग में भिखनपुरा में ‘न्यू मुजफ्फरपुर जंक्शन’ बनाने का प्रस्ताव सोनपुर रेल मंडल द्वारा तैयार किया गया है। यह पूरा प्रोजेक्ट मुजफ्फरपुर के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा, जिससे न केवल परिचालन क्षमता बढ़ेगी बल्कि शहर के विकास को भी नई गति मिलेगी।
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