मुजफ्फरपुर: प्रसाद हॉस्पिटल पर गिरेगी गाज, नक्शे से अलग अवैध निर्माण और आईसीयू का खुलासा
प्रसाद हॉस्पिटल की मनमानी पर नगर निगम सख्त
मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में हुई भीषण अग्निकांड के बाद अब इस अस्पताल के निर्माण को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हो गया है कि अस्पताल का पूरा ढांचा स्वीकृत नक्शे के नियमों को ताक पर रखकर खड़ा किया गया था। नगर निगम की जांच में पता चला है कि अस्पताल प्रबंधन ने न केवल भवन का विस्तार अवैध तरीके से किया, बल्कि जिस आईसीयू वार्ड में आग लगने से सात मरीजों की जान गई थी, वह हिस्सा भी पूरी तरह से अवैध था।
नक्शे से अलग खड़ा किया गया था अस्पताल
नगर निगम प्रशासन ने कड़ी मशक्कत के बाद वर्ष 2011 के पुराने रिकॉर्ड से अस्पताल का मूल नक्शा खोज निकाला। रिकॉर्ड के अनुसार, अस्पताल के लिए ‘जी प्लस फोर’ (G+4) भवन की अनुमति दी गई थी। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन ने नियमों का उल्लंघन करते हुए ‘जी प्लस फाइव’ (G+5) इमारत खड़ी कर दी और बाद में बिना किसी प्रशासनिक मंजूरी के भवन का और अधिक विस्तार कर लिया।
जांच रिपोर्ट में गंभीर खामियां
जिलाधिकारी को सौंपी गई पांच सदस्यीय जांच टीम की रिपोर्ट ने अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही की पोल खोल दी है। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- अस्पताल का आईसीयू वार्ड स्वीकृत नक्शे का हिस्सा ही नहीं था।
- अवैध निर्माण के कारण सुरक्षा मानकों का पालन करना असंभव था।
- फायर विभाग ने अस्पताल की फायर एनओसी (NOC) रद्द करने की सिफारिश की है।
- सिविल सर्जन द्वारा अस्पताल का लाइसेंस पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
प्रबंधन को नोटिस, ध्वस्तीकरण की तैयारी
नगर आयुक्त ऋतुराज प्रताप सिंह ने अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं रहा, तो अवैध हिस्से को ध्वस्त करने के साथ ही भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा। घटना के समय आईसीयू में 27 मरीज भर्ती थे, जिनमें से सात की दर्दनाक मौत हो गई थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि आग लगने के बाद अस्पताल के कर्मचारी मरीजों को छोड़कर भाग गए थे। यह मामला अब केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि गंभीर प्रशासनिक और सुरक्षात्मक चूक के रूप में देखा जा रहा है, जिस पर प्रशासन सख्त कार्रवाई की तैयारी में है।
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