मुजफ्फरपुर में नदियों को दूषित करने वाले निजी नर्सिंग होम पर गिरेगी गाज, स्वास्थ्य विभाग सख्त
मुजफ्फरपुर में निजी नर्सिंग होम और अस्पतालों द्वारा बायोमेडिकल कचरे के अनुचित निस्तारण को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी के निर्देश के बाद जिले भर के निजी स्वास्थ्य संस्थानों की व्यापक जांच शुरू कर दी गई है। इस कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मेडिकल कचरे का निपटान निर्धारित नियमों के अनुसार हो और पर्यावरण तथा जनस्वास्थ्य को होने वाले नुकसान को रोका जा सके।
जांच के दायरे में सभी निजी नर्सिंग होम
सिविल सर्जन सुधीर कुमार ने मंगलवार को सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) के प्रभारियों को पत्र जारी कर अपने-अपने क्षेत्र में संचालित निजी नर्सिंग होम की तत्काल जांच करने और विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इस खबर से उन अस्पताल संचालकों में हड़कंप मच गया है, जो लंबे समय से नियमों का उल्लंघन कर रहे थे। जांच में मुख्य रूप से यह देखा जाएगा कि अस्पतालों से निकलने वाले बायोमेडिकल कचरे का संग्रह और निस्तारण तय मानकों के अनुरूप हो रहा है या नहीं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट बनी आधार
यह कार्रवाई बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की गंभीर रिपोर्टों के बाद तेज हुई है। बोर्ड ने जिले में बायोमेडिकल कचरे के उचित निस्तारण को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की थी। रिपोर्टों में यह सामने आया था कि कुछ निजी नर्सिंग होम और क्लीनिक मेडिकल कचरे का सही तरीके से निपटान करने के बजाय उसे स्थानीय जलस्रोतों, विशेषकर बूढ़ी गंडक नदी में फेंक रहे थे। यह एक गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी खतरा है।
अधिकृत एजेंसी का उपयोग अनिवार्य
राज्य सरकार ने सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों से बायोमेडिकल कचरे के सुरक्षित संग्रह और निस्तारण के लिए एक विशेष एजेंसी को अधिकृत किया है। नियमानुसार, सभी अस्पतालों और नर्सिंग होम को अपना बायोमेडिकल कचरा इसी अधिकृत एजेंसी को सौंपना होता है, जो इसे सुरक्षित तरीके से निस्तारित करती है। हालांकि, यह सामने आया है कि कुछ निजी नर्सिंग होम लागत बचाने या लापरवाही के कारण इस अधिकृत एजेंसी की सेवाओं का उपयोग नहीं कर रहे थे।
कठोर कार्रवाई की तैयारी
जांच पूरी होने के बाद, यदि किसी अस्पताल या नर्सिंग होम में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने दोषी पाए जाने वाले संस्थानों का लाइसेंस रद्द करने और भारी जुर्माना लगाने की तैयारी कर ली है। इस पहल का लक्ष्य बायोमेडिकल कचरे के सुरक्षित निस्तारण को सुनिश्चित करना और मुजफ्फरपुर के नागरिकों के स्वास्थ्य तथा पर्यावरण की रक्षा करना है। यह कदम शहर को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
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