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मुजफ्फरपुर में पर्यटन को लगेंगे पंख: नौका विहार, पिकनिक स्पॉट और प्राचीन मंदिरों का होगा कायाकल्प

मुजफ्फरपुर, जिसे अक्सर उत्तर बिहार का देवघर कहा जाता है, अब एक नए पर्यटन मानचित्र पर उभरने को तैयार है। जिले में तीन प्रमुख मंदिरों और एक विशाल झील को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। इस पहल से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पर्यटकों को भी एक नया और आकर्षक गंतव्य मिलेगा।

मणिका मन: प्रकृति प्रेमियों का नया ठिकाना

मुशहरी प्रखंड स्थित मणिका मन झील, जो 124.26 एकड़ में फैली है, को एक आधुनिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध यह झील अब नौका विहार, मोटर बोट और फ्लोटिंग जेटी जैसी सुविधाओं से लैस होगी। पर्यटन विभाग द्वारा यहां रेस्तरां और पिकनिक स्पॉट भी बनाए जा रहे हैं। अगले वर्ष से पर्यटकों के लिए इसके खुलने की संभावना है। स्थानीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए इसे ‘दिल्ली हाट’ और जुब्बा सहनी आर्ट गैलरी की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को भी रोजगार के अवसर मिलेंगे।

बाबा गरीबनाथ मंदिर: कॉरिडोर की तर्ज पर विकास

शहर के हृदय में स्थित बाबा गरीबनाथ मंदिर, जो लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, को कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना पर लगभग पांच करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसका उद्देश्य मंदिर परिसर को और अधिक भव्य और सुगम बनाना है, ताकि दूर-दराज से आने वाले भक्तों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

प्राचीन मंदिरों का जीर्णोद्धार और शिव सर्किट में जुड़ाव

मुजफ्फरपुर के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बीबीगंज स्थित बाबा गणिनाथ मंदिर और बंदरा स्थित बाबा खगेश्वरनाथ मंदिर को भी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। पर्यटन विभाग ने इन मंदिरों के विकास के लिए जिला प्रशासन से सर्वे रिपोर्ट मांगी है। बाबा गणिनाथ मंदिर का भूमि संबंधी सर्वे पूरा हो चुका है और रिपोर्ट अपर समाहर्ता, राजस्व को सौंप दी गई है।

इन मंदिरों के साथ-साथ बाबा गरीबनाथ मंदिर और औराई स्थित भैरव स्थान मंदिर को भी ‘शिव सर्किट’ से जोड़ा जा रहा है। यह पहल धार्मिक पर्यटन को एक नया आयाम देगी। बाबा खगेश्वरनाथ मंदिर का संबंध रामायण काल से माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यहीं पर भगवान राम और लक्ष्मण के नागपाश में बंधने के दौरान गरुड़ के संदेह को महादेव ने दूर किया था। यहां का लाल रंग का अनोखा शिवलिंग स्वतः प्रकट माना जाता है, जो भक्तों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र है।

इन सभी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद मुजफ्फरपुर न केवल धार्मिक बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भी एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में उभरेगा, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।


अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध स्थानीय स्रोतों के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है। AI से त्रुटियाँ संभव हैं और इस सामग्री की सटीकता या प्रामाणिकता की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। TheAinak केवल सूचनाओं का संकलन करता है और इसकी विषय-वस्तु के लिए उत्तरदायी नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने या उसके आधार पर कोई कार्रवाई करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य कर लें।

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