मुजफ्फरपुर में पेंशन उत्सव: 4.17 लाख लाभार्थियों के खाते में पहुंची 64.58 करोड़ की राशि
मुजफ्फरपुर के पेंशनभोगियों के लिए राहत भरी खबर
मुजफ्फरपुर जिले के लाखों बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों के लिए शुक्रवार का दिन खुशियां लेकर आया। राज्य सरकार द्वारा आयोजित ‘पेंशन उत्सव’ के तहत जिले के 4 लाख 17 हजार से अधिक लाभार्थियों के बैंक खातों में जून महीने की पेंशन राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से भेज दी गई है। इस बार कुल 64 करोड़ 58 लाख 31 हजार 400 रुपये की राशि का वितरण किया गया है, जिससे जिले के जरूरतमंद परिवारों को बड़ी आर्थिक राहत मिली है।
विभिन्न योजनाओं का लाभ
जिले के समाहरणालय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में जिला पदाधिकारी कुमार गौरव ने इस प्रक्रिया का जायजा लिया। सरकार की विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत यह राशि वितरित की गई है। आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना के तहत सबसे अधिक 2,11,150 लाभार्थियों को 24.54 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हुई है। इसके अलावा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत 1.27 लाख से अधिक लोगों को 27.98 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
अन्य योजनाओं का विवरण इस प्रकार है:
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना: 27,500 लाभार्थियों को 6.05 करोड़ रुपये।
- बिहार नि:शक्तता पेंशन योजना: 22,050 लाभार्थियों को 2.47 करोड़ रुपये।
- लक्ष्मीबाई सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना: 26,745 लाभार्थियों को 3.85 करोड़ रुपये।
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय नि:शक्तता पेंशन योजना: 2,336 लाभार्थियों को 51.39 लाख रुपये।
जीवन प्रमाणीकरण है अनिवार्य
कार्यक्रम के दौरान जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पेंशन का लाभ निर्बाध रूप से मिलता रहे, इसके लिए ‘जीवन प्रमाणीकरण’ (Life Certification) अत्यंत आवश्यक है। जिला पदाधिकारी ने सभी पेंशनभोगियों से अपील की है कि वे अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पर जाकर जल्द से जल्द अपना प्रमाणीकरण पूरा करवा लें। अब तक जिले में 4.36 लाख से अधिक लाभार्थियों ने यह प्रक्रिया पूरी कर ली है।
पेंशन की राशि बढ़कर 1100 रुपये प्रतिमाह होने से लाभार्थियों को अपनी दैनिक जरूरतों, जैसे भोजन और दवाओं के खर्च में काफी मदद मिल रही है। डीबीटी के माध्यम से सीधे खाते में पैसा आने से पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सुगम हो गई है, जिससे बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह खत्म हो गई है। यह पहल समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों को आर्थिक सुरक्षा और सम्मान प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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