मुजफ्फरपुर में फर्जी डिग्री पर नौकरी का खुलासा: कुढ़नी के दो शिक्षकों पर गिरी गाज, मनियारी थाने में केस दर्ज
शिक्षा विभाग में हड़कंप: फर्जी प्रमाण-पत्रों से चल रही थी नौकरी
मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी प्रखंड में फर्जी शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों के सहारे नौकरी कर रहे दो शिक्षकों की पोल खुल गई है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में इन दोनों शिक्षकों के दस्तावेज पूरी तरह से जाली पाए गए हैं। इस मामले में मनियारी थाने में दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिससे स्थानीय शिक्षा विभाग और नियोजन इकाइयों में खलबली मच गई है।
क्या है पूरा मामला?
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो पटना के जांचकर्ता दिवाकर कुमार दिनकर के अनुसार, पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर वर्ष 2006 से 2015 के बीच नियुक्त शिक्षकों के दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। इसी कड़ी में कुढ़नी प्रखंड के दो शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों को सत्यापन के लिए हिंदी विद्यापीठ, देवघर भेजा गया था। वहां से मिली रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि संबंधित प्रमाण-पत्र कभी जारी ही नहीं किए गए थे।
किन शिक्षकों पर हुई कार्रवाई?
- निर्मला सिंह: अख्तियारपुर परैया पंचायत नियोजन इकाई के तहत वर्ष 2005 में नियुक्त निर्मला सिंह वर्तमान में मध्य विद्यालय बलरा किशुन में कार्यरत थीं। जांच में उनका इंटरमीडिएट का प्रमाण-पत्र फर्जी पाया गया है।
- संजय कुमार राम: राज पकाही पंचायत नियोजन इकाई के तहत नियुक्त संजय कुमार राम राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बाघी माधो में तैनात थे। उनका स्नातक (साहित्यालंकार) का प्रमाण-पत्र जांच में जाली निकला है।
आगे की कार्रवाई
निगरानी ब्यूरो ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि इन शिक्षकों ने बिचौलियों और नियोजन इकाई के सदस्यों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची और धोखाधड़ी से सरकारी वेतन का लाभ उठाया। जांचकर्ता ने जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) को पत्र लिखकर इन दोनों शिक्षकों पर तत्काल प्रभाव से अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि हाईकोर्ट द्वारा दिए गए मोहलत के समय में भी इन शिक्षकों ने इस्तीफा नहीं दिया था, जिसके बाद अब कानूनी शिकंजा कस गया है।
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