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मुजफ्फरपुर में स्वास्थ्य संकट: बच्चों पर बेअसर हो रही एंटीबायोटिक दवाएं, SKMCH की रिसर्च ने बढ़ाई चिंता

मुजफ्फरपुर के बच्चों के लिए बढ़ता खतरा

मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच (SKMCH) से एक बेहद चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। अस्पताल के शिशु रोग और माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा किए गए एक संयुक्त अध्ययन में यह बात स्पष्ट हुई है कि बच्चों पर अब सामान्य एंटीबायोटिक दवाओं का असर कम होता जा रहा है। यह स्थिति न केवल डॉक्टरों के लिए चुनौती बनी हुई है, बल्कि अभिभावकों के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है।

क्यों बेअसर हो रही हैं दवाएं?

विशेषज्ञों के अनुसार, एंटीबायोटिक दवाओं का अनियंत्रित और अत्यधिक इस्तेमाल इसका मुख्य कारण है। ग्रामीण इलाकों में झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा सर्दी-जुकाम जैसी सामान्य बीमारियों में भी एंटीबायोटिक का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा, कई बार अभिभावक दवा दुकानदारों की सलाह पर खुद ही बच्चों को एंटीबायोटिक दे देते हैं। सबसे बड़ी गलती तब होती है जब दवा का कोर्स पूरा नहीं किया जाता। दो-तीन खुराक के बाद आराम मिलते ही दवा बंद कर देने से बैक्टीरिया पूरी तरह खत्म नहीं होते और वे उस दवा के प्रति प्रतिरोधी (रेसिस्टेंट) हो जाते हैं।

गंभीर बीमारियों का इलाज हुआ महंगा

इस रेजिस्टेंस के कारण अब निमोनिया, डायरिया और बैक्टीरियल बुखार जैसी बीमारियों से जूझ रहे बच्चों को ठीक करने के लिए डॉक्टरों को मजबूरन ‘रिजर्व कैटेगरी’ की महंगी और शक्तिशाली एंटीबायोटिक दवाएं लिखनी पड़ रही हैं। यदि यही स्थिति बनी रही, तो भविष्य में सामान्य संक्रमणों का इलाज करना भी नामुमकिन हो सकता है।

सामूहिक प्रयास की तैयारी

इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए अब राज्य के प्रमुख संस्थान एक साथ आए हैं। एसकेएमसीएच, होमी भाभा कैंसर अस्पताल, पीएमसीएच, डीएमसीएच और एनएमसीएच मिलकर एक विशेष अभियान चला रहे हैं। होमी भाभा कैंसर अस्पताल के रिसर्चर मरीजों के उपचार के तरीकों और दवाओं के असर का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। साथ ही, जीनोम सिक्वेंसिंग के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कौन सी दवा किस मरीज पर असर कर रही है और कौन सी नहीं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इस बढ़ते खतरे को देखते हुए डॉक्टरों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि सामान्य संक्रमणों में सबसे पहले प्राथमिक श्रेणी की दवाओं का उपयोग किया जाना चाहिए। उच्च क्षमता वाली और रिजर्व कैटेगरी की दवाओं का इस्तेमाल केवल तभी होना चाहिए जब स्थिति अत्यंत गंभीर हो।

अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि बिना डॉक्टर की सलाह के बच्चों को कोई भी दवा न दें और कोर्स को हमेशा पूरा करें।


अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध स्थानीय स्रोतों के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से तैयार किया गया है। AI से त्रुटियाँ संभव हैं और इस सामग्री की सटीकता या प्रामाणिकता की कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। TheAinak केवल सूचनाओं का संकलन करता है और इसकी विषय-वस्तु के लिए उत्तरदायी नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी जानकारी पर भरोसा करने या उसके आधार पर कोई कार्रवाई करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य कर लें।

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