मुजफ्फरपुर: रौतनिया डंपिंग यार्ड में कचरा निष्पादन की तैयारी, एक हफ्ते में शुरू होगा वैज्ञानिक प्रसंस्करण
रौतनिया डंपिंग यार्ड की समस्या का समाधान जल्द
मुजफ्फरपुर के रौतनिया डंपिंग यार्ड में वर्षों से जमा कचरे के पहाड़ से स्थानीय लोगों को जल्द ही राहत मिलने की उम्मीद है। प्रशासन ने इस दिशा में कदम उठाते हुए घोषणा की है कि अगले एक सप्ताह के भीतर यहां कचरा निष्पादन का कार्य विधिवत शुरू कर दिया जाएगा। इस महत्वपूर्ण परियोजना की तैयारियों का जायजा लेने के लिए बुधवार को स्वच्छता निदेशक सह अपर सचिव विजय मीणा और नगर आयुक्त ऋतुराज प्रताप सिंह ने स्थल का निरीक्षण किया।
आधुनिक तकनीक से होगा कचरे का निपटारा
अधिकारियों के अनुसार, रौतनिया डंपिंग यार्ड में लगभग एक लाख मीट्रिक टन कचरा जमा हो चुका है, जो आसपास के निवासियों के लिए स्वास्थ्य और पर्यावरण की गंभीर समस्या बना हुआ है। इस कचरे के वैज्ञानिक प्रसंस्करण के लिए एक एजेंसी का चयन किया जा चुका है और आवश्यक मशीनरी भी साइट पर पहुंच गई है। यहां एक आधुनिक ‘मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी’ (MRF) प्लांट स्थापित किया जाएगा। इस प्लांट के माध्यम से गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग कर उनका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा। विशेष रूप से गीले कचरे से गैस बनाने की योजना है, जिसे तेल कंपनियों को आपूर्ति किया जाएगा।
स्थानीय लोगों का संघर्ष और विधायक का अल्टीमेटम
रौतनिया में कचरा डंपिंग के कारण आसपास के दर्जनों गांवों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। दुर्गंध, मक्खियों और मच्छरों के प्रकोप के कारण बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, साथ ही सामाजिक जीवन पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बदबू और गंदगी के कारण विवाह जैसे मांगलिक कार्यों में भी बाधाएं आ रही हैं।
इस मुद्दे पर कांटी विधायक ई. अजीत कुमार ने प्रशासन को 31 जुलाई तक का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि एक अगस्त तक स्थिति में सुधार नहीं हुआ और कचरा गिराना बंद नहीं किया गया, तो प्रशासन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। विधायक ने याद दिलाया कि पूर्व में भी कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन समयसीमा बीत जाने के बाद भी काम पूरा नहीं हो सका। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन एक सप्ताह के भीतर शुरू होने वाले इस कार्य को समय पर पूरा कर पाता है या स्थानीय लोगों का आक्रोश और बढ़ेगा।
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